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लियाकत मामले की जांच एनआईए को

लियाकत मामले की जांच एनआईए को

नई दिल्ली. 25 मार्च 2013 बीबीसी

सुशील कुमार शिंदे


गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने लियाकत अली मामले की जाँच एनआईए को सौंपने का आदेश दिया है. लियाकत पर दिल्ली में कथित रुप से धमाके करने की साजिश रचने का आरोप लगा था. उनकी गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली और जम्मू कश्मीर पुलिस के बीच रस्साशी चल रही है.

दिल्ली पुलिस ने जब पिछले हफ्ते लियाकत अली को जब गिरफ़्तार किया था तो माना जा रहा था कि एक बड़ी घटना घटने से रोक ली गई है. लेकिन अगले कुछ दिनों में इसके जो विवरण आए हैं उससे साफ है कि दाल में कुछ काला ज़रुर है.

एक तरफ जहां दिल्ली पुलिस का दावा है कि लियाकत अली एक चरमपंथी हैं वही जम्मू कश्मीर पुलिस ने ज़ोर शोर से कहा है कि लियाकत आत्मसमर्पण करने के लिए भारत लौट रहे थे. हालात यहां तक पहुंचे कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से इस मामले की एनआईए से जांच करने की सिफारिश कर डाली.

दिल्ली पुलिस का दावा है कि लियाकत शाह नेपाल के रास्ते आ रहा था जहां उसका काम दिल्ली में होली के दौरान मुंबई में 2008 के हमलों की तर्ज पर तबाही मचाना था. पुलिस के अनुसार लियाकत के पास हिजबुल मुजाहिदीन के बड़े चरमपंथियों के फोन नंबर भी थे. लियाकत अली शाह को नेपाल चेक पोस्ट पर उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भारत लौट रहे थे.

जाने माने पत्रकार प्रवीण स्वामी ने फर्स्ट पोस्ट अख़बार में अपने कॉलम में लियाकत शाह के बारे में और जानकारी देते हुए कहा है कि लियाकत के बारे में दिल्ली पुलिस के दावे बहुत खोखले प्रतीत होते हैं.उधर जम्मू कश्मीर पुलिस ने कहा है कि लियाकत चरमपंथियों को सुधार के तहत बसाए जाने की प्रक्रिया के तहत वापस लौट रहे थे.

लेकिन आख़िर लियाकत चरमपंथी नहीं थे तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार क्यों किया. जानकार इस मामले में दिल्ली पुलिस के बेहद ख़राब रिकार्ड का हवाला देते हैं जहां कई मामलों में पुलिस ने पहले भी निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया है. फिलहाल मामला आला अधिकारियों के पास है और लियाकत अली शाह का भविष्य अधर में.


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