पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

भेड़-बकरियों की तरह होता है मतदान-काटजू

भेड़-बकरियों की तरह होता है मतदान-काटजू

नई दिल्ली. 31 मार्च 2013

मार्कंडेय काटजू


अपने बयानों के लिये विवादों में रहने वाले भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू ने कहा है कि भारत की जनता भेड़-बकरियों की तरह मतदान करती है. 90 प्रतिशत भारतीय भेड़ों के झुंड की तरह हैं जो जाति और धर्म के आधार पर मतदान करते हैं. यह एक कड़वी सच्चाई है और चूंकि भारत की जनता पशुधन की तरह मतदान करती है, इस कारण संसद में इतने अपराधी हैं.

इससे पहले पिछले साल काटजू ने कहा था कि 90 फीसदी भारतीय मूर्ख होते हैं और उन्हें धर्म के नाम पर आसानी से बहकाया जा सकता है. उन्होंने एक सेमिनार में बोलते हुए कहा कि हमारे देश में लोग धर्म के नाम पर बहुत आसानी से लड़ने-मरने के लिए तैयार हो जाते हैं क्योंकि उनके दिमाग में अक्ल नाम की चीज़ नहीं होता. जस्टिस काटजू के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली में भी महज 2000 रुपए देकर सांप्रदायिक दंगा भड़काया जा सकता है. माना जा रहा है कि काटजू का ताजा बयान एक बार फिर उनके लिये मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

एक चैनल से बातचीत में मार्कण्डेय काटजू ने यह भी कहा कि वह चुनावों में मतदान नहीं करेंगे क्योंकि ऐसी स्थिति में यह ‘अर्थहीन’ है. उन्होंने कहा कि हमारा लोकतंत्र अब भी संक्रमण काल से गुजर रहा है और सामंतों ने उसे अगवा कर लिया है. जाट, मुसलमान, यादव या हरिजन के नाम देखकर मतदान किए जाते हैं. लोकतंत्र इस तरह चलने के लिए नहीं है. मेरे एक वोट से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. जानवरों की झुंड में शामिल होकर मैं अपना वक्त भला क्यों बर्बाद करूं?

काटजू ने कहा कि मैं सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ हूं. यह विविधता का देश है और यदि हम सभी को साथ लेकर नहीं चलेंगे तो हम एक दिन भी नहीं जिंदा रह सकते.

मार्कंडेय काटजू ने अफसोस जताते हुये कहा कि वकील और प्रोफेसर जैसे समाज के संभ्रात लोग भी जाति आधार पर वोट डालते हैं और उन्होंने इलाहाबाद बार और विश्वविद्यालय में ऐसा होते देखा है. काटजू ने कहा कि वे पूर्णरूपेण धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं और धर्मनिरपेक्ष होने पर यदि उन्हें कांग्रेसी करार दिया जाता है तो लोग ऐसा दृष्टिकोण रखने के लिए स्वतंत्र हैं.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

roushan kumar [roushankumar151@gmail.com] MUMBAI - 2013-03-31 15:28:22

 
  आपकी बात में सच्चाई है, लेकिन आपकी वोट नहीं देने वाली बात मुझे तो मूर्खतापूर्वक बात लगती है. इस लोकतंक्ष में चुनाव को ही देश का सबसे बड़ा महापर्व माना गया है. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in