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स्टरलाइट इंडसट्रीज़ पर सौ करोड़ जुर्माना

स्टरलाइट इंडसट्रीज़ पर सौ करोड़ जुर्माना

नई दिल्ली. 2 अप्रैल 2013

sterlite copper smelting


उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट इंडसट्रीज़ पर उसके तांबा गलाने के संयंत्र में पर्यावरण कानूनों की अनदेखी करने के लिए 100 करोड़ का जुर्माना लगाया है. कंपनी को ये जुर्माना पाँच साल की अवधि के अंदर तूतीकोरिन जिला प्रशासन को चुकाना होगा. हालांकि न्यायालय ने कंपनी के टूटीकोरिन संयंत्र को बंद करने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए कंपनी को कुछ राहत जरूर दी है.

मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस ए.के.पटनायक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि कंपनी के कार्यखाने के कारण लंबे समय से प्रदूषण हो रहा है और इसीलिए कंपनी को इसके लिए मुआवज़ा देना होगा. पीठ ने कहा कि मुआवजे का ‘डर होना चाहिए’ और इसकी राशि कंपनी की भुगतान क्षमता देख कर तय की जानी चाहिए और इस मामले में 100 करोड़ से कम की राशि के मुआवजे के बिना कानून का डर पैदा नहीं होगा.

इसी मामले में साल 2010 में मद्रास उच्च न्यायालय ने आदेश दिए थे कि लंबे समय से चली आ रही प्रदूषण संबंधी दिक्कतों को लेकर इस संयंत्र को बंद कर दिया जाना चाहिए. मद्रास उच्च न्यायालय का कहना था कि चूंकि ये संयंत्र समुद्र तट की सीमा से 25 किलोमीटर के अंदर चल रहा है और कंपनी ने यूनिट के 250 मीटर के दायरे में एक ग्रीन बेल्ट भी विकसित नहीं की है, पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है.

उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश कंपनी वेदांता की स्वामित्व वाली स्टरलाइट का कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट तमिलनाडु के तटीय इलाके तूतीकोरिन में 14 वर्षों से है और इस प्लांट पर लगातार पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगते रहे हैं. साल 2010 के मार्च महीने में इलाके में अज्ञात गैस के रिसाव से लोगों को सांस लेने में परेशानी और संक्रमण का सामना करना पड़ा था जिसके बाद मद्रास हाईकोर्ट ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया था.
 


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