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बलात्कार रोधी विधेयक राष्ट्रपति को मंजूर

बलात्कार रोधी विधेयक राष्ट्रपति को मंजूर

नई दिल्ली. 3 अप्रैल 2013

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बलात्कार रोधी विधेयक पर अपनी सहमति दे दी है. इस विधेयक में दुष्कर्म के लिए अधिक दंड देने, पीछा करने और घूरने को अपराध की श्रेणी में रखने और सहमति से यौन संबंध स्थपित करने की उम्र को 18 साल करने का प्रावधान है. अब चूंकि राष्ट्रपति ने भी इस विधेय़क पर अपनी मंजूरी दे दी है इसे कानून के रूप में मान्यता मिल गई है.

गृह मंत्रालय ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया है कि अब इस विधेयक को आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम-2013 कहा जाएगा. इस संशोधित कानून में यौन प्रताड़ने की घटनाओं के लिए बेहद कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. इसके अनुसार बलात्कार को आरोपी को कड़े कारावास की सजा तक दी जा सकती है जो 20 साल से कम नहीं होगी लेकिन इसे आजीवन कारावास तक में तब्दील किया जा सकता है. इसके साथ ही दोषी पर जर्माना लगाने का भी प्रावधान है.

इसके अलावा इस कानून में ये भी प्रावधान है कि यदि कोई अपराधी ऐसे अपराधों के लिए पहले भी दोषी ठहराया जा चुका हो तो उसे मौत की सजा भी दी जा सकती है, साथ ही ऐसे अपराध के लिए न्यूनतम सज़ा सात साल की रखी गई है.

बताया जा रहा है कि इस कानून के लिए प्रावधानों को तय करते समय न्यायमूर्ति जे.एस.वर्मा समिति की सिफारिशों को भी शामिल किया है जो इसे और कड़ा बनाता है. इससे पहले ये विधेयक लोकसभा में 19 मार्च को राज्यसभा में 21 मार्च को ही पारित किया जा चुका है.


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