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पांच मामलों में अगले सप्ताह फांसी

पांच मामलों में अगले सप्ताह फांसी

नई दिल्ली. 4 अप्रैल 2013

फांसी


राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने द्वारा 5 दया याचिकाओं को खारिज करने के बाद अगले एक पखवाड़े में इन सभी को फांसी की सजा दी जा सकती है. राष्ट्रपति ने सभी 7 दया याचिकाओं में से 5 में आरोपियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा, जबकि दो मामले में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है. जिन लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है, उसमें हरियाणा के धर्मपाल का मामला बहुचर्चित रहा है.

रोहतक जेल में बंद धर्मपाल पर आरोप है कि 1991 में उसने सोनीपत में एक लड़की के साथ रेप किया था. इस मामले में उसे 10 साल की सजा सुनाई गई थी. लेकिन 1993 में जब वह 5 दिनों के लिये पैरोल पर रिहा हुआ तो अपने भाई निर्मल के साथ उसने रेप पीड़िता के घर रात में घुस कर पीड़िता के माता-पिता तले राम और कृष्णा, बहन नीलम, भाई प्रवीण और टीनू की लाठी से पीट-पीट कर हत्या कर दी.

इस मामले में अदालत ने धर्मपाल और निर्मल को मौत की सजा सुनाई थी. निर्मल की सजा बाद में उम्र कैद में बदल दी गई थी. हालांकि वह भी पैरोल पर रिहा होने के बाद फरार हो गया और उसे 10 सालों के बाद गिरफ्तार किया जा सका था. इधर धर्मपाल ने 1999 में दया याचिका दायर की थी लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई. इसके बाद 2005 में उसने फिर से राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की. जिसे अब जा कर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने खारिज कर दी है. माना जा रहा है कि डेथ वारंट मिलते ही अगले सप्ताह तक अंबाला या हिसार जेल में उसे फांसी देने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी.


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