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भारतीय उद्योगपतियों का सनसनीखेज खुलासा

भारतीय उद्योगपतियों का सनसनीखेज खुलासा

नई दिल्ली. 5 अप्रैल 2013

टैक्स


भारत के कम से कम 612 उद्योगपतियों ने विदेशों में फर्जी कंपनी बना कर करोड़ों रुपये के टैक्स की चोरी की है. वाशिंगटन के इंटरनैशनल कंसोर्सियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स यानी आईसीआईजे ने एक सनसनीखेज रहस्योद्घाटन करते हुये दुनिया भर के ऐसे लोगों और कंपनियों का नाम सामने लाया है, जिन्होंने टैक्स बचाने के लिये फर्जीवाड़ा किया है.

इसके लिये संस्था ने लगभग 25 लाख फाइलों के दस्तावेज एकत्र किये. इंटरनैशनल कंसोर्सियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने जो दस्तावेज सामने लाये हैं, वे विकिलीक्स के अमेरिकी विदेश विभाग के लीक किए गए दस्तावेजों से 160 गुना ज्यादा हैं. इनमें 30 सालों के दस्तावेज हैं.

संस्था ने अलग-अलग देशों के 1 लाख 20 हजार से अधिक नाम सार्वजनिक किये, जिन्होंने फर्जी तरीके से टैक्स बचाने के लिये विदेशों में कंपनियां खोल लीं. इंटरनैशनल कंसोर्सियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने 170 देशों के 1.2 लाख फर्म्स, ट्रस्ट और एजेंट्स के बारे में जो सनसनीखेज राज खोला है, उसमें भारत के 612 उद्योगपति शामिल हैं.

इंटरनैशनल कंसोर्सियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स यानी आईसीआईजे के दस्तावेजों के अनुसार किंगफिशर के मालिक विजय माल्या, सांसद विवेकानंद गद्दम, अभय कुमार ओसवाल, तेजा राजू, सौरभ मित्तल, रविकांत रुइया, समीर मोदी, चेतन बर्मन जैसे 612 उद्योगपतियों ने विदेशों में फर्जी कंपनियां खोलकर टैक्स चोरी की और अपने पैसों को खपाया है.

इन उद्योगपतियों ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, कुक आइलैंड और समोआ जैसे टैक्स हेवन समझे जाने वाले देशों में फर्जी कंपनियां और खाते खोले हैं. आईसीआईजे ने दावा किया है कि भारत में इन औद्योगिक घरानों ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और फेमा नियमों को तार-तार कर दिया. आईसीआईजे ने इन उद्योगपतियों के लेन-देन के विस्तृत दस्तावेज भी सार्वजनिक किये हैं.


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