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गोंडा फर्जी मुठभेड़: तीन पुलिसकर्मियों को फांसी

गोंडा फर्जी मुठभेड़: तीन पुलिसकर्मियों को फांसी

लखनऊ. 5 अप्रैल 2013

Death Sentence


उत्तरप्रदेश के गोंडा जिले में 31 साल पहले हुई एक फर्जी मुठभेड़ में दोषी पाए गए तीन पुलिसकर्मियों को फांसी एवं पाँच अन्य को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है. सीबीआई की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया जिसमें तीन पुलिसकर्मी आरबी सरोज, राम नायक पाण्डेय और रामकरन को तात्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के.पी.सिंह और 12 अन्य गांववालों की फर्जी मुठभेड़ दिखा हत्या करने का दोषी पाया गया और उन्हें फांसी की सज़ा दी गई.

दरअसल 12 मार्च 1982 को गोंडा जिले के डीएसपी के.पी.सिंह कटराबाजार थाना क्षेत्र के माधवपुर गांव कुछ आरोपियों को गिरफ्तार करने गए थे. लेकिन इलाके के कौड़िया पुलिस स्टेशन के तात्कालीन थानाध्यक्ष आर. बी. सरोज, मुख्य कांस्टेबल राम नायक पाण्डेय तथा सिपाही राम करन ने ही आरोपियों को इसकी सूचना दे दी जिन्होंने के.पी सिंह की गांव में घुसते ही गोली मार कर हत्या कर दी.

बाद में इन पुलिसकर्मियों ने माधवपुर पहुँच कर 12 गांव वालों की निर्ममता से हत्या कर दी जिससे कि ये प्रतीत हो कि डीएसपी के.पी.सिंह की हत्या गांव में मुठभेड़ के दौरान हुई. बाद में के.पी.सिंह की पत्नी विभा सिंह ने संदेह के आधार पर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसके आदेश पर ये मामला सीबीआई को सौंपा गया था.

सीबीआई ने अपनी जाँच में मुठभेड़ को फर्जी पाते हुए 19 आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था. इनमें से दस आरोपियों की मृत्यु मुकदमे की विवेचना के दौरान ही हो गई. अब तीन पुलिसकर्मियों को फांसी देने के अलावा एक पुलिसकर्मी प्रेम सिंह रैकवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया और शेष पाँच पुलिसकर्मियों रमाकान्त दीक्षित, दारोगा नसीम अहमद, मंगल सिंह, परवेज हुसैन, राजेन्द्र प्रसाद सिंह को उम्रकैद दी गई है.


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