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साड्डा हक के बैन पर बवाल

साड्डा हक के बैन पर बवाल

नई दिल्ली. 6 अप्रैल 2013

साड्डा हक


खालिस्तान आंदोलन पर बनी पंजाबी फिल्म साडा हक पर पंजाब, दिल्ली और हरियाणा में बैन किये जाने के बाद से पंजाब में तनाव का माहौल है. सिख संगठनों ने इस बैन का विरोध करते हुए कहा है कि उनकी आवाज दबायी जा रही है और सरकार सच का गला घोंट रही है. वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने फिल्म कहा है कि प्रदेश में शांति और सांप्रदायिक सद्भावना कायम रखना मेरी पहली प्राथमिकता है.

प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि हम शांति और सांप्रदायिक सद्भभावना की शर्त पर किसी फिल्म को रिलीज करने की अनुमति नहीं दे सकते. मैं नहीं चाहता कि इस फिल्म से प्रदेश की शांति भंग हो. इधर दल खालसा के चीफ एच. एस. धामी ने अकाली के नेतृत्व वाली सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि पंजाब सरकार ने नौकरशाहों के दबाव में आकर यह फैसला किया है.

गौरतलब है कि साड्डा हक फिल्म मूलतः सिखों पर हुये अत्याचार और खालिस्तान आंदोलन को केंद्र में रख कर बनाई गई है. कहा जा रहा है कि फिल्म से खालिस्तान आंदोलन को महिमामंडित करने की कोशिश की जा रही है. फिल्म में बेअंत सिंह की हत्या के आरोप में फांसी की सजा पाये बलवंत सिंह राजोआना और जनरैल सिंह भिंडरावाले को विद्रोही नेता के रुप में दिखाया गया है.

फिल्म के निर्माता कुलजिंदर सिद्धू का कहना है कि सिख समुदाय में गुरुओं के वक्त से लेकर आज तक विद्रोही हुए हैं. जब भी उन्हें लगता है, व्यवस्था में कुछ खामी है, वे व्यवस्था के खिलाफ चले जाते हैं और इसीलिए बागी कहलाते हैं. सिद्धू का कहना है कि उन्होंने राजोआना और भिंडरावाले की तुलना सिख धर्म गुरुओं से नहीं की है और उनकी फिल्म पर प्रतिबंध हिंदू समाज की तुष्टि के लिये किया गया है.


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