पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

बीटी कॉटन के चक्रव्यूह से निकलना जरूरी

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

बीटी कॉटन के चक्रव्यूह से निकलना जरूरी

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >कला >दिल्ली Print | Share This  

साड्डा हक के बैन पर बवाल

साड्डा हक के बैन पर बवाल

नई दिल्ली. 6 अप्रैल 2013

साड्डा हक


खालिस्तान आंदोलन पर बनी पंजाबी फिल्म साडा हक पर पंजाब, दिल्ली और हरियाणा में बैन किये जाने के बाद से पंजाब में तनाव का माहौल है. सिख संगठनों ने इस बैन का विरोध करते हुए कहा है कि उनकी आवाज दबायी जा रही है और सरकार सच का गला घोंट रही है. वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने फिल्म कहा है कि प्रदेश में शांति और सांप्रदायिक सद्भावना कायम रखना मेरी पहली प्राथमिकता है.

प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि हम शांति और सांप्रदायिक सद्भभावना की शर्त पर किसी फिल्म को रिलीज करने की अनुमति नहीं दे सकते. मैं नहीं चाहता कि इस फिल्म से प्रदेश की शांति भंग हो. इधर दल खालसा के चीफ एच. एस. धामी ने अकाली के नेतृत्व वाली सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि पंजाब सरकार ने नौकरशाहों के दबाव में आकर यह फैसला किया है.

गौरतलब है कि साड्डा हक फिल्म मूलतः सिखों पर हुये अत्याचार और खालिस्तान आंदोलन को केंद्र में रख कर बनाई गई है. कहा जा रहा है कि फिल्म से खालिस्तान आंदोलन को महिमामंडित करने की कोशिश की जा रही है. फिल्म में बेअंत सिंह की हत्या के आरोप में फांसी की सजा पाये बलवंत सिंह राजोआना और जनरैल सिंह भिंडरावाले को विद्रोही नेता के रुप में दिखाया गया है.

फिल्म के निर्माता कुलजिंदर सिद्धू का कहना है कि सिख समुदाय में गुरुओं के वक्त से लेकर आज तक विद्रोही हुए हैं. जब भी उन्हें लगता है, व्यवस्था में कुछ खामी है, वे व्यवस्था के खिलाफ चले जाते हैं और इसीलिए बागी कहलाते हैं. सिद्धू का कहना है कि उन्होंने राजोआना और भिंडरावाले की तुलना सिख धर्म गुरुओं से नहीं की है और उनकी फिल्म पर प्रतिबंध हिंदू समाज की तुष्टि के लिये किया गया है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in