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धरमपाल की फांसी पर रोक

धरमपाल की फांसी पर रोक

चंडीगढ़. 7 अप्रैल 2013

फांसी


राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा दया याचिका खारिज किये जाने के बाद भी फिलहाल बलात्कार व हत्या के आरोपी धरमपाल को फांसी नहीं दी जायेगी. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अर्जी के आधार पर उसकी धरमपाल की फांसी पर 10 अप्रैल तक रोक लगा दी है. लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल नामक संगठन ने उसकी दया याचिका को निपटाने में हुई देरी को आधार बनाया है. इसके बाद न्यायमूर्ति ए के मित्तल और न्यायमूर्ति जी एस संधवालिया की पीठ ने हरियाणा सरकार को 10 अप्रैल तक अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया है.

हालांकि हरियाणा के पुलिस महानिदेशक जेल का कहना है कि धरमपाल को 15 अप्रैल को फांसी पर चढ़ाने का निर्णय लिया गया है. अदालत ने अभी 10 अप्रैल तक रोक के लिये कहा है. हम फिलहाल 10 अप्रैल को अदालत के निर्णय की प्रतीक्षा करेंगे कि आगे क्या करना है. हालांकि हमारी ओर से अभी भी फांसी की तारीख 15 अप्रैल ही है.

रोहतक जेल में बंद धर्मपाल पर आरोप है कि 1991 में उसने सोनीपत में एक लड़की के साथ रेप किया था. इस मामले में उसे 10 साल की सजा सुनाई गई थी. लेकिन 1993 में जब वह 5 दिनों के लिये पैरोल पर रिहा हुआ तो अपने भाई निर्मल के साथ उसने रेप पीड़िता के घर रात में घुस कर पीड़िता के माता-पिता तले राम और कृष्णा, बहन नीलम, भाई प्रवीण और टीनू की लाठी से पीट-पीट कर हत्या कर दी.

इस मामले में अदालत ने धर्मपाल और निर्मल को मौत की सजा सुनाई थी. निर्मल की सजा बाद में उम्र कैद में बदल दी गई थी. हालांकि वह भी पैरोल पर रिहा होने के बाद फरार हो गया और उसे 10 सालों के बाद गिरफ्तार किया जा सका था. इधर धर्मपाल ने 1999 में दया याचिका दायर की थी लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई. इसके बाद 2005 में उसने फिर से राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की. जिसे अब जा कर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने खारिज कर दी. जेल प्रशासन द्वारा उसे 15 अप्रैल को अंबाला जेल में फांसी देने की तैयारी पूरी कर ली है. लेकिन अब अदालती पेंच के बाद मामला खटाई में पड़ता दिख रहा है.


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