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आठ लोगों की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

आठ लोगों की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्ली. 7 अप्रैल 2013

फांसी


अफजल गुरु की तरह फांसी के मुद्दे पर विवाद न हो, इस कारण सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा दया याचिका खारिज किये जाने के बाद आठ लोगों को होने वाली फांसी पर फिलहाल रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस की याचिका पर शनिवार की देर शाम फैसला सुनाया. जस्टिस सदशिवम के घर पर हुई इस बहस में कहा गया कि इन अभियुक्तों की याचिका इतने सालों तक लंबित रखी गयी, जो उनके अधिकार का हनन है.

लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल के अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस ने चंदन चस्कर वीरप्पन के साथियों की फांसी की सजा का उदाहरण देते हुये बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी देने के बाद भी उनकी दया याचिका वर्षों तक पेंडिग में रखी गई. इसी आधार पर वीरप्पन के साथियों की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है.

इसके बाद अदालत ने कहा कि एक बार फिर से जम्मू-कश्मीर के अफजल गुरु मामले में गलती नहीं दोहराई जानी चाहिए. अफजल गुरु मामले में फांसी पर लटका देने के बाद परिवार वालों को सूचना दी गई थी. यह बिल्कुल बुरा हुआ था. ऐसे में जिस शख्स को फांसी दी जानी है उससे अंतिम बार उसके परिवार वालों को मिलने का भी मौका नहीं मिलता है.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शउन 8 लोगों की फांसी पर चार हफ्तों के लिए रोक लगा दी, जिनकी दया याचिका इसी हफ्ते राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने ठुकरा दी थी. इस मामले में अब केंद्र सरकार के जवाब के बाद ही इस मामले पर सुनवाई होगी.


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