पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

संघर्ष को रचनात्मकता देने वाले अनूठे जॉर्

पूर्वोत्तर व कश्मीर में घिरी केंद्र सरकार

भीड़ के ढांचे का सच खुल चुका

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

पूर्वोत्तर व कश्मीर में घिरी केंद्र सरकार

भीड़ के ढांचे का सच खुल चुका

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

भुल्लर की फांसी पर मुहर

भुल्लर की फांसी पर मुहर

नई दिल्ली. 12 अप्रैल 2013

देविंदर पाल सिंह भुल्लर


बम धमाके में 9 लोगों की हत्या के आरोपी देविंदर पाल सिंह भुल्लर की उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसमें फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने की मांग की गई थी. राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका 11 सालों तक लंबित रखने को चुनौती दी थी. याचिका में कहा गया था कि वह इतने सालों तक मौत का इंतजार करते-करते मानिसक संतुलन खो बैठा था. इसलिये उसकी फांसी की सजा को रद्द कर उसे उम्र कैद की सजा सुनाई जाये.

गौरतलब है कि देविंदर पाल सिंह भुल्लर को एम. एस. बिट्टा पर बम हमला करने में अहम भूमिका के लिए मौत की सजा दी गई थी. यह हमला भुल्लर ने 1993 में किया था. इसमें 9 पुलिस वाले मारे गए थे और 25 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. इन 25 घायलों में भुल्लर भी था. भुल्लर को मौत की सजा मिलने के बाद राष्ट्रपति ने दया याचिका 11 सालों तक लंबित रखी.

भुल्लर ने सुप्रीम कोर्ट में इस आधार पर याचिका दायर की थी वह 20 सालों तक कैद रहा, जो कि आजीवन कारावास की तरह है. साथ ही उसने कोर्ट से कहा था कि दया याचिका पर 11 सालों से इंतजार करते-करते वह पूरी तरह से मानसिक संतुलन खो बैठा है. भुल्लर की दलील थी कि लंबे समय तक काल कोठरी में मौत की सजा इंतजार करना क्रूरता है और यह मूल अधिकार का उल्लंघन है. लेकिन अदालत ने दया याचिका को लंबित रखने के आधार को खारिज कर दिया.

अदालत के इस निर्णय के बाद राष्ट्रपति के पास फांसी की दया याचिका लंबे समय तक लंबित रहने के आधार पर दायर कई याचिकाओं पर भी असर पड़ेगा. माना जा रहा है कि राजीव गांधी की हत्या के आरोपी और वीरप्पन के साथियों की फांसी की रास्ता भी अब साफ हो गया है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in