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प्राण को दादा साहब फाल्के अवार्ड

प्राण को दादा साहब फाल्के अवार्ड

मुंबई. 12 अप्रैल 2013

प्राण


हिंदी फिल्मों के सुप्रसिद्ध अभिनेता प्राण को दादा साहेब फाल्के अवार्ड दिया जायेगा. 93 साल के प्राण को फिल्म जगत में उनके अतुलनीय योगदान के लिये यह अवार्ड दिया जायेगा.

12 फरवरी 1920 को दिल्ली में पैदा हुये प्राण ने सैकड़ों फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाई हैं. उनकी संवाद अदायगी का जादू कई दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री पर छाया रहा है. 1940 में यमला जट फिल्म से अपना करियर शुरु करने वाले प्राण ने 2002 में बनी तुम जीओ हजारों साल तक कई फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 'जंजीर', 'कर्ज' और 'डॉन' जैसी फिल्में हमेशा याद की जाने वाली फिल्में हैं.

प्राण के पिता लाला केवल कृष्ण सिकंद एक सरकारी ठेकेदार थे, जो आम तौर पर सड़क और पुल का निर्माण करते थे. देहरादून के पास कलसी पुल उनका ही बनाया हुआ है. अपने काम के सिलसिले में इधर-उधर रहने वाले लाला केवल कृष्ण सिकंद के बेटे प्राण की शिक्षा कपूरथला, उन्नाव, मेरठ, देहरादून और रामपुर में हुई.

बतौर फोटोग्राफर लाहौर में अपना करियर शुरु करने वाले प्राण को 1940 में ‘यमला जट’ नामक फिल्म में पहली बार काम करने का अवसर मिला. उसके बाद तो प्राण ने फिर पलट कर नहीं देखा. उन्होंने लगभग 400 फिल्मों में काम किया. एक तरफ उनके नाम ‘राम और श्याम’ के खलनायक की ऐसी तस्वीर रही है, जिससे लोगों ने परदे के बाहर भी घृणा शुरु कर दी थी, वहीं उनके नाम ‘उपकार’ के मंगल चाचा की भूमिका भी है, जिसे दर्शकों का बेइंतहा प्यार और सम्मान मिला. 1968 में उपकार, 1970 आँसू बन गये फूल और 1973 में प्राण को बेईमान फिल्म में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिये फिल्म फेयर अवार्ड दिया गया. इसके बाद मिले सम्मान और अवार्ड की संख्या सैकड़ों में है. 2001 में प्राण को पद्म भूषण से सम्मानित किया.

1945 में शुक्ला से विवाहित प्राण भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद बेटे अरविंद, सुनील और एक बेटी पिंकी के साथ मुंबई आ गये. आज की तारीख में उनके परिवार में 5 पोते-पोतियां और 2 पड़पोते भी शामिल हैं. खेलों के प्रति प्राण का प्रेम भी जगजाहिर है. 50 के दशक में उनकी अपनी फुटबॉल टीम ‘डायनॉमोस फुटबाल क्लब’ बहुचर्चित रहा है.


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