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बालको चिमनी कांड में 15 पर मुकदमा

बालको चिमनी कांड में 15 पर मुकदमा

कोरबा. 15 अप्रैल 2013

वेदांता


वेदांता-स्टरलाइट की बालको चिमनी हादसे में बालको और उससे जुड़े कुल 15 लोगों के खिलाफ 40 मजदूरों की मौत के मामले में गैरइरादतन हत्या और साक्ष्य छुपाने का मामला चलेगा. 23 सितंबर 2009 को सरकारी जमीन पर अवैध रुप से बालको द्वारा पावर प्लांट के लिये बनाई जा रही चिमनी धंस गई थी. इस मामले में वेदांता-स्टरलाइट की बालको और उससे जुड़ी कंपनियों को गैर इरादतन हत्या का आरोपी बनाते हुये कोरबा की निचली अदालत ने आरोप तय किये हैं.

कोरबा की एक अदालत ने वेदांता-स्टरलाइट कंपनी बालको के अधिकारी, चिमनी का निर्माण करने वाली ठेका कंपनी सेपको के परियोजना प्रबंधक और उप ठेका कंपनी जीडीसीएल के परियोजना प्रबंधक व इंजीनियर, वल्लभगढ़ के वैज्ञानिक और इंजीनियर को इस मामले में आरोपी बनाते हुये गैर इरादतन हत्या का मामला चलाने का आदेश दिया है.

इस मामले में कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है लेकिन जीडीसीएल कंपनी के तीन कर्मचारी आज तक फरार हैं. इस मामले में वल्लभगढ़ के दो वैज्ञानिक व इंजीनियरों को गैरइरादतन हत्या के मामले में गलत रिपोर्ट देने का आरोप है. उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के तहत मामला चलेगा.

छत्तीसगढ़ में वेदांता कंपनी आदिवासियों के बीच बदनाम रही है. बालको द्वारा जिस जमीन पर चिमनी का निर्माण किया जा रहा था, उस पर वेदांता के बेजा कब्जा को लेकर मामला न्यायालय में है. भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में जब कोरबा निवासी राज्य के वन मंत्री ननकी राम कंवर ने वेदांता के खिलाफ मोर्चा खोला और 1036 एकड़ वन भूमि पर बेजा कब्जे का सवाल उठाया तो हफ्ते भर बाद उनका विभाग छिन गया.

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम का एक बड़ा हिस्सा वेदांता को खनिज उत्खनन के लिए दे दिया. मध्य प्रदेश ने 16 जून 1969 को एक अधिसूचना जारी की थी कि इस इलाके में खनिज उत्खनन का काम केवल सरकारी उपक्रम ही कर सकते हैं. अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद भी कई कंपनियों को इसी आधार पर यहां उत्खनन की अनुमति नहीं दी गई. लेकिन वेदांता के लिए इस नियम को किनारे करके बैगा आदिवासी बहुल यह इलाका बाक्साईट खनन के लिए दे दिया गया. बिना आदिवासियों के विस्थापन का काम किए वेदांता ने खनन का काम शुरू कर दिया. इसके अलावा छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर में वेदांता को करोड़ों की जमीन कौड़ियों में दिए जाने को लेकर भी विधानसभा में खूब बहस हुई. लेकिन वेदांता की मनमानी जारी रही.