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पुलिस की पिटाई और अब जाँच भी

पुलिस की पिटाई और अब जाँच भी

मुंबई. 18 अप्रैल 2013

sachin suryawanshi


महाराष्ट्र विधानसभा परिसर के अंदर बुरी तरह से पिटने वाले ट्रैफिक इंस्पेक्टर सचिन सूर्यवंशी को इन विधायकों से दुश्मनी मोल लेना महंगा पड़ गया है. मामले की जाँच के लिए बनी कमिटी ने पिटने वाले इंस्पेक्टर के व्यवहार के तरीकों पर उंगली उठाते हुए उसके खिलाफ जाँच करने की सिफारिश की है. यहीं नहीं उसे पीटने वाले विधायकों में सी तीन को क्लीन चिट देते हुए बाकी दो विधायकों को हालांकि दोषी माना लेकिन यह भी जोड़ा गया कि पिटाई उतनी गंभीर नहीं है जितना उसे बताया जा रहा है.

विधायक गणपतराव देशमुख की अध्यक्षता में बनी जाँच कमिटी ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र विधानसभा में अपनी जाँच रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट में बताया गया है कि मारपीट के आरोप में निलंबित तीन विधायक - बीजेपी के जयकुमार रावल, शिवसेना के राजन साल्वी और निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल की इस मामले में बिल्कुल भी संलिप्तता नहीं पाई गई. जबकि दो अन्य महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राम कदम और बहुजन विकास अघडी के क्षितिज ठाकुर ने पिटाई जरूर की लेकिन वो इतनी भी गंभीर नहीं थी.

कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में ये अनुशंसा की है कि मामले में क्लीन चिट पाए तीन विधायकों का निलंबन इसी सत्र में समाप्त कर दिया जाए औऱ बाकी दो यानी राम कदम और क्षितिज ठाकुर का निलंबन भी मानसून निरस्त कर दिया जाए. मामले की पूरी जिम्मेदारी पिटने वाले ट्रैफिक इंस्पेक्टर सचिन सूर्यवंशी पर डालते हुए कमिटी कहती है कि पिटाई के लिए पुलिस अफसर खुद ही जिम्मेदार थे और विधायक के साथ बदसलूकी के आरोप में उन्हें निलंबित करने का फैसला जायज है. समिति ने सूर्यवंशी की विभागीय जाँच भी किए जाने की सिफारिश की है.

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र पुलिस में एसिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत सचिन सूर्यवंशी की इन विधायकों ने विधानसभा परिसर में उस समय पिटाई कर दी थी जब वो गृहमंत्री आर.आर.पाटिल से मिलने जा रहे थे. दरअसल सूर्यवंशी ने बांद्रा इलाके में निर्दलीय विधायक क्षितिज ठाकुर की गाड़ी रोक कर उनसे पूछताछ की थी, और उन दोनों के बीच कहासुनी हो गई थी. बताया जा रहा है इस बात को लेकर ही ठाकुर सूर्यवंशी से नाराज़ थे और इसी का बदला बाकी विधायकों के साथ सूर्यवंशी को पीटकर लिया था.

सूर्यवंशी को इतनी बुरी तरह से पीटा गया था कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. बाद में मामले का संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र विधानसभा ने इन पाँचों विधायकों को निलंबित कर दिया था और जाँच कमिटी का गठन किया था.