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शमशाद हमेशा रहेंगी याद

शमशाद हमेशा रहेंगी याद

मुंबई. 24 अप्रैल 2013

शमशाद बेगम


हिंदी फिल्मों की सुप्रसिद्ध गायिका शमशाद बेगम का मुंबई में 94 साल की उम्र में निधन हो गया. भारतीय फिल्मों के अमर गीत गाने वाली शमशाद बेगम पिछले कुछ सालों से बीमार चल रही थीं और इन दिनों अस्पताल में भर्ती थीं. मुंबई में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

अमृतसर में 14 अप्रैल 1919 को जन्मी शमशाद बेगम ने पेशावर रेडियो से अपने करिअर की शुरुवात की. बाद में उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में भी काम किया. इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिये गायन शुरु किया.

गीता दत्त, लता मंगेश्कर जैसी उनकी समकालीन गायिकाओं के दौर में फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था लेकिन शमशाद बेगम ने अपनी खनकती आवाज के साथ अपनी न केवल पहचान बनाई बल्कि कई अवसरों पर इन गायिकाओं को पीछे भी छोड़ दिया. 1955 में अपने पति गणपत लाल बट्टो के निधन के बाद से शमशाद मुंबई में अपनी बेटी ऊषा रात्रा और दामाद के साथ रह रही थीं. 2009 में उन्हें पद्मभूषम सम्मान से नवाज़ा गया था.

'सैंया दिल में आना रे', 'कजरा मोहब्बत वाला' 'कभी आर कभी पार...', 'कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना...' , 'ले के पहला-पहला प्यार...', 'बूझ मेरा क्या नाम रे...' और 'छोड़ बाबुल का घर...' जैसे अमर गीतों के कारण शमशाद बेगम भारतीय हिंदी संगीत में हमेशा याद की जाएंगी.