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गांधीजी को ब्रांड बनाने का विरोध

गांधीजी को ब्रांड बनाने का विरोध

नई दिल्ली. 30 सितंबर 2009

 

गांधी शांति प्रतिष्ठान के सचिव सुरेंद्र कुमार ने महात्मा गांधी के नाम पर 14 लाख रुपए की कलम बनाए जाने का विरोध किया है. उनका मानना है कि गांधी जी सादगी पसंद थे और उनके नाम का इस्तेमाल कर अपना सामान बेचने की कोशिश करना बिल्कुल गलत है. गौरतलब है कि एक बहुराष्टीय कंपनी मो ब्लां गांधीजी की 40 जयंती के मौके पर 18 कैरेट सोने के निब वाली कलम बाजार में लाई है.

इस कलम की कीमत लगभग डेढ़ से 14 लाख रुपए के बीच में है. इसकी निब पर लाठी पकड़े गांधीजी का आकृति बनी हुई है. इस मुद्दे पर सुरेंद्र कुमार जी का मानना है कि बाजार की ताकतें गांधीजी का इस्तेमाल एक ब्रांड के रूप में करना चाहती है जो कि सर्वथा उनके सिद्धांतों के खिलाफ है. महात्मा गांधी जी ने अपना पूरा जीवन सादगी के साथ फिजूलखर्ची से दूर रहकर व्यतीत किया गया है. और उनके नाम का ऐसा इस्तेमाल करना गलत है और इस पर जल्द से जल्द रोक लगनी चाहिए.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

rohit pandey (aboutrohit@gmail.com) gorakhpur

 
 सुरेंद्र जी, गांधीजी को ब्रांड बनने से आप कैसे रोक सकते हैं जब आज़ाद भारत के सत्ता प्रतिष्ठान के लिए गांधी ब्रांड बने हुए हैं. आपका तर्क है कि गांधी सादगी पसंद है इसीलिए 14 लाख की कलम नहीं हो सकती. बाजार की ताकतें गांधी का इस्तेमाल सामान बेचने के लिए कर रही हैं. सुरेंद्र जी कंपनी तो सामान बेचने के लिए कर रही है लेकिन हम लोग तो गांधी का इस्तेमाल से इमान बेच रहे हैं.

इतने सारी अराष्ट्रीय अमानवीय कार्य हो रहे हैं गांधी के प्रति आस्थावानों ने ऐसा क्या कर सके कि उनकरे विचारों को आचरण प्रदान कर सके. गांधी का कांग्रेस को अब लगा की सादगी चाहिए जबह देश की 80 फीसदी जनता दो वक्त की रोटी की मोहताज है. क्या ये विडंबना नहीं कि ग्रामस्वराज और रामराज्य का सपना गांधी के देश में गोडसेवादी देखने लगे. गांधी जयंती पर यह भी विचार के बिंदु हो सकते हैं. गनीमत है कि सेने के निब वाली कलम ही बनाई है कल को कारतूस पर भी गांधी छपेंगे तो क्या होगा ? हे राम !
 
   

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