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मुशर्रफ पर आजीवन प्रतिबंध

मुशर्रफ पर आजीवन प्रतिबंध

इस्लामाबाद. 1 मई 2013

परवेज मुशर्रफ


बड़े अरमानों के साथ पाकिस्तान लौटे तानाशाह राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का राजनीतिक सफर अब थम सकता है. पाकिस्तान की एक हाईकोर्ट ने उनके आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

2007 में देश में इमरजेंसी के दौरान जजों को हिरासत में रखने और दो बार संविधान का उल्लंघन करने के आरोप में उनके खिलाफ पेशावर हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि पूरी जिंदगी बैन इसलिए लगाया गया है क्योंकि मुशर्रफ ने दो बार संविधान को निरस्त किया और 2007 में इमरजेंसी के दौरान जजों को हिरासत में लिया. कोर्ट ने कहा कि मुशर्रफ को राष्ट्रीय, प्रांतीय और सेनेट के चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाता है.

जनरल परवेज मुशर्रफ ने 1998 में नवाज शरीफ का तख्ता पलट कर पाकिस्तान की सत्ता पर कब्जा किया था और लगातार उन्होंने 2008 तक पाकिस्तान पर शासन किया. इससे पहले 2001 में मुशर्रफ ने खुद को पाकिस्तान का राष्ट्रपति घोषित कर दिया था. लेकिन 2008 में देश में बनते राजनीतिक दबाव के कारण वे पाकिस्तान से खुद ही निर्वासित हो कर लंदन और दुबई चले गये थे, जहां से इसी महीने उनकी पाकिस्तान वापसी हुई है.

परवेज मुशर्रफ के खिलाफ पाकिस्तान की अलग-अलग अदालतों में कई मुकदमें हैं. 2006 में बलोच नेता अकबर खान बुगटी की मौत और 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के मामले में पाकिस्तान की पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की बात कही थी. दिसंबर 2007 में हुई पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के मामले में रालवपिंडी की अदालत ने उन्हें अदालत में तलब किया था लेकिन वे अदालत में नहीं आये. इसके बाद रावलपिंडी की इस अदालत ने उन्हें फरार घोषित कर दिया था.

पंजाब सरकार ने पहले ही कह रखा था कि अगर मुशर्रफ ने मुल्क में कदम रखा तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया जायेगा. इन सबों के बाद जब मुशर्रफ पाकिस्तान लौटे तो उनपर 60 जजों को बर्खास्त कर उन्हें नजरबंद करने के मामले में गिरफ्तार करके उन्हें उनके फार्महाउस में ही नजरबंद कर के रखा गया है.