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ये कैसी आस्था है- उच्चतम न्यायालय

ये कैसी आस्था है- उच्चतम न्यायालय

नई दिल्ली. 7 मई 2008

 

रामसेतु मामले में सुनवाई करते हुए आज उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश आर रवींद्रन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह से आस्था का सवाल उठाया जा रहा है, उसमें तो धरती को आप भू माता कह देंगे. गोवर्धन को भगवान कृष्ण ने उठाया था, इस तर्क के कारण तो मथुरा में कोई निर्माण ही नहीं हो सकता.

 

रामसेतु मामले में मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन, न्यायाधीश जेएम पांचाल और न्यायाधीश आरवी रवींद्रम की खंठपीठ में सुनवाई चल रही है.

 

न्यायमूर्ति रवींद्रन ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि हिमालय की पूजा होती है, पेड़ की पूजा होती है. ऐसे में तो हिमालय में बांध नहीं बना सकते. इसी तरह पेड़ों को भी नहीं काटा जा सकता.

 

न्यायमूर्ति रवींद्रन ने कहा कि क्या 300 मीटर रामसेतु तोड़ने से वह रामसेतु नहीं रह जाएगा? मुख्य न्यायाधीश बालाकृष्णन ने भी पूछा कि धार्मिक आस्था और विश्वास क्या है ?

 

अपना पक्ष पेश करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के पाराशरन ने कहा कि हिंदू धर्म में विग्रह में दरार आने पर उसे पूजने की परंपरा नहीं है.