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फेसबुक कमेंट पर गिरफ्तारी से पहले अनुमति जरूरी

फेसबुक कमेंट पर गिरफ्तारी से पहले अनुमति जरूरी

नई दिल्ली. 16 मई 2013

ए. राजा


उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर प्रकाशित आपत्तिजनक टिप्पणीयों को मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66ए के तहत गिरफ्तारी करने के लिए पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी की अनुमति लेना आवश्यक है. न्यायमूर्ति बीएस चौहान और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा, ‘हम राज्य सरकारों को निर्देश देते हैं कि किसी भी गिरफ्तारी से पहले केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें.’

गौरतलब है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने गत 9 जनवरी को सभी राज्य सरकारों को सूचना भेजी थी कि फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर की गई टिप्पणियों और उन्हें लाइक करने के मुद्दे पर गिरफ्तारी करने से पहले किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मंजूरी ली जाए.

उच्चतम न्यायालय श्रेया सिंघल की पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबरटीज (पीयूसीएल) कार्यकर्ता जया विंध्याल की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी. जया पर आरोप थे कि उन्होंने फेसबुक पर अपनी टाइमलाइन में चिराला के विधायक अमानची कृष्णा मोहन और तमिलनाडु के राज्यपाल के रोसैया के खिलाफ अपमानजनक बातें लिखी थीं.

इसके बाद जया विंधायल को पुलिस द्वारा 12 मई को सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66ए के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था. उल्लेखनीय है कि आईटी अधिनियम की धारा 66ए संचार सेवा के माध्यम से ऐसे संदेश भेजे जाने पर दंडात्मक प्रावधान से संबंधित है, जिससे लोगों को असुविधा, गुस्सा, खीझ, अपमान आदि अनुभव हों या ये संदेश बुरी नीयत अथवा नफरत से भेजे गए हों.


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