पहला पन्ना >कला >पश्चिम Print | Share This  

ऋतुपर्णो घोष नहीं रहे

ऋतुपर्णो घोष नहीं रहे

कोलकाता. 30 मई 2013

ऋतुपर्णो घोष


सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक ऋतुपर्णो घोष नहीं रहे. 49 साल के ऋतुपर्णो घोष का गुरुवार की सुबह कोलकाता में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वे लंबे समय से पैंक्रियाटाइटिस के कारण परेशान थे. चोखेर बाली, रेनकोट और द लास्ट लियर जैसी उनकी फिल्मों ने उन्हें खास पहचान दिलाई थी. उन्हें 12 बार नेशनल फिल्म अवार्ड दिया गया था.

ऋतुपर्णो घोष के पिता डॉक्युमेंट्री फिल्म मेकर थे. ऋतुपर्णो घोष को 1994 में बाल फिल्म 'हिरेर अंगति' के निर्देशन से प्रसिद्धि मिली थी. इसके बाद 'उनिशे अप्रैल' के लिए उन्हें 1995 में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा गया. उन्होंने इसके अलावा 'दहन', 'असुख', 'बेरीवाली', 'अंतरमहल' और 'नौकादुबी' जैसी बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन किया. बंगाली फिल्म चित्रांगदा ऋतुपर्णो घोष की आखिरी फिल्म थी. ऋतुपर्णो घोष इन दिनों रविंद्रनाथ टैगोर पर एक डॉक्युमेंट्री बना रहे थे.

ऋतुपर्णो घोष के निधन पर फिल्म जगत में शोक की लहर है. फिल्म निदेशक मधुर भंडारकर ने लिखा है कि ऋतुपर्णो घोष के निधन की खबर से मैं सदमे में हूं. मैं ऋतु से कुछ-एक मौकों पर मिला था. वह बेहद गर्मजोश इंसान थे. वह बहुत याद आएंगे. अभिनेता सौमित्र चटर्जी ने घोष के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे भरोसा ही नहीं हो रहा कि घोष नहीं रहे. इस खबर को स्वीकार करना बड़ा मुश्किल है. हमने एक बेहतरीन फिल्म निर्देशक को बहुत कम उम्र में खो दिया.