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आडवाणी ने दिया पार्टी पदों से इस्तीफा

आडवाणी ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली. 10 जून 2013

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भाजपा में किनारे कर दिए गए वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पार्टी में समस्त पदों से इस्तीफा दे दिया है. आडवाणी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को पत्र लिख कर कहा है कि वे राष्ट्रीय कार्यकारिणी, संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति के पदों से इस्तीफा दे रहे हैं, हालांकि अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया है.

अपने पत्र में आडवाणी कहा है कि, “मैंने पूरी जिंदगी जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करने में गर्व और संतुष्टि हासिल की है. कुछ समय से मैं अपने आपको पार्टी के मौजूदा काम करने के तरीके और दिशा-दिशा के जोड़ नहीं पा रहा हूं. मुझे लगता है कि भाजपा अब वह आदर्श पार्टी नहीं रही, जिसका गठन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख और अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था, जिसका एकमात्र ध्येय देश और देशवासी हुआ करते थे. आज के हमारे ज्यादातर नेता सिर्फ अपने हितों को लेकर चिंतित हैं”.

आडवाणी के इस्तीफे के बाद एनडीए के संयोजक और जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यह गठबंधन के सेहत के लिए ठीक नहीं है और उनकी पार्टी अब एनीए में बने रहने के बारे में नए सिरे से विचार करेगी.

उल्लखनीय है कि आडवाणी नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने से नाराज़ थे. आडवाणी ने मोदी को प्रचार समिति का संयोजक बनाने के लिए तो सहमत थे लेकिन उसका अध्यक्ष बनाने को राज़ी नहीं थे लेकिन पार्टी ने अनकी नाराज़गी की परवाह न करते हुए मोदी को यह पद सौंप दिया था.  अपनी पार्टी से इस तरह की अवहेलना झेल रहे आडवाणी ने रविवार को लिखे अपने ब्लॉग में महाभारत के पात्रों का सहारा लेते हुए इशारों ही इशारों में अपनी पीड़ा बयान की थी.