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आंखों के सामने बह गये बाढ़ में

आंखों के सामने बह गये बाढ़ में

देहरादून. 20 जून 2013

बाढ़


उत्तराखंड की बाढ से बचे लोगों की आंखों में खौफ है और मौत का मंजर भी. किसी के सामने देखते-देखते पूरा घर भरभरा कर गिर गया तो किसी के सामने पूरी बस बह गई. सरकार का दावा है कि अभी तक 150 लोगों की मौत हुई है लेकिन प्रत्यक्षदर्शी हजारों लोगों की मौत की आशंका व्यक्त कर रहे हैं.

प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से आईबीएन ने कहा है कि मरनेवालों की असल तादाद बहुत ज्यादा है. जैसे जैसे राहत का काम आगे बढ़ेगा वैसे वैसे मौत का आंकड़ा भी बढ़ेगा. 62 हजार से ज्यादा लोग रास्ते में फंसे हुए हैं. 5 हजार से ज्यादा अकेले केदारनाथ धाम से लापता हैं. कई लोग ऐसे इलाकों में फंसे हैं जिन्हें मदद मिलनी तो दूर खाने-पीने की चीजों तक के लाले पड़ गए हैं. सुरक्षित निकाले गए कुछ लोगों का कहना है कि वो आटा खाकर और नदी का पानी पीकर जिंदा रहे.

इस बाढ़ को लेकर तस्वीरें और चश्मदीदों के बयान से साफ है कि हालात भयावह हैं. बारिश रुकने से राहत के काम में तेजी जरूर आई है लेकिन खतरा और बढ़ गया है. खतरा बारिश के बाद पैदा होने वाली बीमारियों का. पानी के साथ आए मलबे के सड़ने के साथ ही डायरिया, कॉलरा जैसी बीमारियों के साथ साथ संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है. राहत और बचाव के काम में लगे जवानों और प्रशासन को अभी से इससे निपटने की तैयारी करनी होगी.

खराब मौसम की वजह से राहत कार्य में दिक्कत आ रही है. गुरुवार को सुबह 11 बजे तक हेलीकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर पा रहे थे. राहत और बचाव कार्य में करीब 55 हजार जवान जुटे हुए हैं. अब तक 20 हजार लोगों को निकाला गया है. गौरीकुंड में राहत और बचाव कार्य के लिए करीब 100 जवान उतारे गए हैं.

उत्तराखंड में बारिश और बाढ़ से मची तबाही से अब तक 150 लोगों की मौत हो गई है. जैसे-जैसे समय बढ़ रहा है हताहतों की संख्या और बढ़ने की आशंका है. करीब 62 हजार लोग अब भी जगह-जगह फंसे हुए हैं. राहत और बचाव दल केदारनाथ मंदिर पहुंच गया है. यहां के हालात देखकर लग रहा है कि बारिश ने यहां भयंकर तबाही मचाई है. मंदिर बच गया है, लेकिन आसपास के दुकान, होटल तबाह हो गए हैं. पिछले तीन दिनों से कई लोग जगह-जगह फंसे हुए हैं और खुद को और परिजनों को बचान की पुरजोर कोशिश में लगे हैं. लोग परिजनों की तलाश में बदहवास हो रहे हैं और हकीकत ये है कि उन्हें उनके परिजनों की हालत के बारे में ठीक-ठीक बता पाने में प्रशासन असफल हो रहा है.


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