पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >कला >बात Print | Share This  

शार्टकट रोमियो देख कर शरमा जाएंगे

शार्टकट रोमियो देख कर शरमा जाएंगे

मुंबई. 22 जून 2013

अमीषा पटेल


दक्षिण भारत की कोई घटिया फिल्म कैसी हो सकती है, अगर यह जानना हो तो शार्टकट रोमियो को जरुर देखना चाहिये. तमिल फिल्म चिरुट्टू पयाले की इस हिंदी रिमेक में निर्देशक सुशी गणेशन ने जो कुछ किया है, उसे देख कर कोई भी अच्छा-खासा दर्शक माथा पकड़ लेगा. अगर आप फिल्म देख कर टाकिज से बाहर निकल रहे हों तो किसी परिचित को देख कर आप शरमा जाएंगे. पूरी फिल्म का कथानक, संवाद, अभिनय यहां तक कि संगीत भी इतना बचकाना और अपूर्णता से भरा हुआ है कि यह यकीन करना मुश्किल है कि सुशी गणेशन ने इससे पहले भी कई फिल्में बनाई हैं.

फिल्म की कुल जमा कहानी ये है कि नील नीतिन मुकेश एक गोल्फ के मैदान में किसी के साथ शारीरिक संबंध बना रही अरबपति की पत्नी अमीषा पटेल की वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल करना शुरु कर देता है. उसके पैसे से वह दो दिन में ही 75 लाख की खरीदी करता है. अमीषा पटेल के पैसे से वह केन्या जाता है, जहां उसे पूजा गुप्ता मिलती है और पूजा से उसे प्यार हो जाता है. बाद में पूजा का अपहरण हो जाता है और उसका अपहरण अमीषा पटेल करवाती है. उसकी शर्त है कि नील नीतिन मुकेश उसका वीडियो वापस करे. नील नीतिन मुकेश उसे वीडियो वापस देता है तो पता चलता है कि पूजा गुप्ता को अमीषा पटेल ने ही भेजा था.

इसके बाद की कहानी बताने में भी आप बोर हो जाएंगे. बाद की कहानी बदला और रास्ते पर आने की कहानी है, जो इतनी बोरियत से भरी हुई है कि इस बारे में कोई निर्देशक कैसे सोच सकता है, यह सोच कर अच्छा खासा दर्शक भी माथा नोचने लग जाये. पूरी फिल्म में हरेक अभिनेता-अभिनेत्री ओवर एक्टिंग का शिकार है. हरेक का संवाद बोलने का तरीका ऐसा है, गोया स्कूल का बच्चा पहाड़ा पड़ रहा हो. कुल मिला कर यह फिल्म किसी नौसिखिए करोड़पति की फिल्म बनाने की सनक का चकित करने वाला परिणाम लगती है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in