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मनमोहन सिंह पहुंचे कश्मीर

मनमोहन सिंह पहुंचे कश्मीर

जम्मू. 25 जून 2013

मनमोहन सिंह


कश्मीर में आतंकी हमलों के अगले ही दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी कश्मीर पहुंच गये हैं. दोनों नेता कश्मीर की समस्या को जानने के लिये 2 दिन तक यहां रुकेंगे. इससे पहले प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री पुनर्निमाण योजना के अंतर्गत चलने वाली विभिन्‍न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की. इस योजना के तहत 4 क्षेत्रों में 67 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनके दायरे में अर्थव्‍यवस्‍था के 11 क्षेत्र आते हैं.

आर्थिक संरचना का विस्‍तार के लिये इस योजना में पहले क्षेत्र में बिजली, सड़कें और बाहरी ऋण संबंधी कई परियोजनाएं आती हैं. इस क्षेत्र में कई योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनमें सूक्ष्‍म पनबिजली परियोजनाएं, बगलिहार को अतिरिक्‍त केंद्रीय सहायता, डोमेल-कटरा सड़क निर्माण, खानाबल-पहलगांम सड़क का निर्माण, परांगला दर्रे से होते हुए लेह को शिमला से जोड़ने वाली कीबर-कोरजोग सड़क की उपादेयता की जांच और नरबल-टंगमर्ग सड़क निर्माण शामिल हैं.

इसी तरह मनमोहन सिंह ने बुनियादी सेवाओं का विस्‍तार करने का निर्णय लिया गया है. दूसरे क्षेत्र में शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और नागरिक सुविधाओं संबंधी संरचना का निर्माण शामिल है. इस क्षेत्र के अंतर्गत कई परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं, इनमें कारगिल, पुंछ और डोडा जिलों में साक्षरता अभियान, 8000 शिक्षकों को वेतन समर्थन, आईटी/बीपीओ के लिए युवाओं का कौशल प्रशिक्षण, जम्‍मू क्षेत्र में आठ और कश्‍मीर क्षेत्र में छह नए डिग्री कॉलेज खोलना, प्रत्‍येक बस्‍ती में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्‍थापना (लगभग 6817 आंगनवाड़ी केंद्र), राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य‍ मिशन के तहत पूरे राज्‍य को बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवा प्रदान करने के लिए नया केंद्रीय कार्यक्रम, पूरे राज्‍य में आदर्श गांवों का विकास, लेह और कारगिल में एलएएचडीसी को संयुक्‍त अनुदान तथा कारगिल और श्रीनगर के बीच उड़ानों की बारम्‍बारता को बढ़ाना शामिल है.

प्रधानमंत्री द्वारा रोजगार एवं आय सृजन पर भी जोर दिया गया है. परियोजना में कार्यवाही के तीसरे क्षेत्र में पर्यटन, कृषि और खाद्य प्रसंस्‍करण से संबंधित, अन्‍य उद्योग प्रोत्‍साहन से संबंधित उपाय और अन्‍य रोजगार के उपाय शामिल हैं. इस क्षेत्र के अन्‍तर्गत कई परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं, जैसे पूरे राज्‍य में 12 पर्यटन विकास प्राधिकरणों के लिए वित्‍तीय सहायता, विपण्‍णन के लिए यात्रा एजेंटों आदि को सहायता, पर्यटन उद्योग से जुडे व्‍यक्तियों को प्रशिक्षण, होटल प्रबंधन संस्‍थान, श्रीनगर के माध्‍यम से एक वर्षीय कोर्स से शिक्षा प्रदान करके पर्यटन उद्योग में युवाओं में रोजगार/ स्‍वयं रोजगार के कौशल का विकास करना, बागवानी उद्योग का पुनर्वास, स्‍व–रोजगार के लिए कृषि क्लिनिक योजना के अन्‍तर्गत कृषि स्‍नातकों को सहायता, शहतूश से जुडे मसलों पर विशेषज्ञ समूह का गठन करना, श्रीनगर हवाई अड्डे पर ढांचागत सुविधाओं का निर्माण करना, राज्‍य सरकार द्वारा भर्ती पर भारत सरकार की लगाई गयी रोक को हटाना, शहरी बेरोजगार व्‍यक्तियों के लिए स्‍व-रोजगार अवसरों का प्रावधान और स्‍थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के योग्‍य बनाने के लिए 5 और आईआर बटा‍लियनों को बढ़ाना.

इसके अलावा विस्‍थापित और शोक संतप्‍तों के लिए राहत एवं पुनर्वास की भी योजना है. इस परियोजना से जुडी कार्यवाही के चौथे क्षेत्र में आतंकवाद के शिकार और विस्‍थापित परिवारों की सहायता शामिल है. इस क्षेत्र के अन्‍तर्गत परियोजना में कार्यवाही को पूरा कर लिया गया है, जैसे पुनर्वास परिषद के व्‍यय में वृद्धि और जम्‍मू क्षेत्र में अस्‍थायी आश्रयों का निर्माण और कश्‍मीर से पलायन करके आये लोगों के रहने के लिए 2 कमरों का निर्माण.


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