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रैनबैक्सी को सुप्रीम कोर्ट से राहत

रैनबैक्सी को सुप्रीम कोर्ट से राहत

नई दिल्ली. 24 जून 2013

Ranbaxy


दवा निर्माता कंपनी रैनबैक्सी लेबोरेट्रीज़ लिमिटेड को उच्चतम न्यायालय से राहत मिली है. न्यायमूर्ति ए के पटनायक और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने रैनबैक्सी के खिलाफ घटिया दवाओं के उत्पादन और विक्रय करने के आरोप में दायर जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि मामले में कंपनी के खिलाफ पुख्ता सुबूत नहीं है.

अधिवक्ता एम एल शर्मा की इस याचिका में दलील दी थी अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (यूएसएफडीए) ने कंपनी पर मिलावटी दवाएं बनाने और बिक्री के संबंध में 50 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया है. उन्होंने कहा था कि रैनबैक्सी ने इस मामले में आरोप स्वीकार कर लिए थे. इसी वजह से रैनबैक्सी के पोंटा साहिब और देवास स्थित कारखाने बंद किए जाएं और भारतीय दवा नियामक केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) पर उसकी दवाएं प्रतिबंधित न करने के चलते कार्रवाई की जाए.

अब उच्चतम न्यायालीय की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पीठ अमेरिकी अदालत द्वारा कंपनी के खिलाफ दिए गए फैसले के आधार पर याचिका पर फैसला नहीं दे सकती है. पीठ ने कहा चूंकि आपकी दलील अमरीकी न्याय प्रक्रिया पर आधारित है और वो हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं आता इसलिए उसे पुख्ता साक्ष्य नहीं माना जा सकता.

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता हमें ऐसे साक्ष्य दिखाएं जिससे ये सिद्ध हो कि भारत में भी ऐसी चीजें हो रही हैं और इससे लोगों के जीने का अधिकार प्रभावित हो रहा है. उसने कहा कि इस संबंध में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे सिद्ध हो कि रैनबैक्सी के किसी भी कारखाने में विनिर्मित की गई दवाएं घटिया, मिलावटी, नकली है और इन दवाओं पर कानून पाबंदी है, जिनके अभाव में याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती.

पीठ ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा कि अगर कंपनी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई प्रमाण उनके पास है तो वह इसे प्रस्तुत करते हुए पुनर्विचार याचिका दायर कर सकते हैं.


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