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तारीख पर तारीख नहीं देंगे जज

तारीख पर तारीख नहीं देंगे जज

नई दिल्ली. 29 जून 2013

जज


अगर सबकुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले दिनों में तारीख पर तारीख देने वाले जजों के लिये मुश्किल हो सकती है. केंद्र सरकार चाहती है कि सीआरपीसी की धारा 309 में संशोधन कर सुनवाई की समय सीमा को लेकर कोई साफ-साफ निर्देश जोड़ दिया जाये. इसके अनुसार सामान्य हालत में किसी भी मामले में तीन से ज्यादा तारीख नहीं दिये जाने का प्रावधान है. अगर कोई जज किसी मुकदमें में तीन से ज्यादा बार तारीख देता है, तो उपरी अदालत उस पर जुर्माना लगाएगी. केंद्र सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट धारा 309 की इन संशोधित गाइडलाइंस को लागू करवाए. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से राय ली जा रही है.

नभाटा की खबर के अनुसार कानून मंत्रालय की इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट से कई दौर की बातचीत हो चुकी है. सीआरपीसी की धारा 309 में प्रस्तावित संशोधन पर यह बातचीत संतोषजनक बताई जा रही है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट भी कई बार केस लंबा खिंचने पर नाखुशी जाहिर कर चुका है. सरकार को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट सेक्शन 309 की गाइडलाइंस का पालन करवाएगा.

सीआरपीसी की धारा 309 में प्रावधान है कि किसी भी ट्रायल को जल्द से जल्द निपटाया जाए और गवाहों का बयान दर्ज होना प्रतिदिन के आधार पर तब तक जारी रखा जाए जब तक सभी उपस्थित गवाहों के बयान दर्ज न हो जाएं. इसमें कहा गया है कि किसी एक पक्ष की अपील पर तब तक मामले को अगली तारीख तक टाला नहीं जाए, जब तक मामला कंट्रोल से बाहर न हो जा फिर याचिकाकर्ता किसी दूसरे कोर्ट में फंसा न हो. इसमें बाद में यह प्रावधान भी शामिल किया गया कि कोर्ट में गवाही के लिए उपस्थित गवाह को परीक्षित किए बिना कोई स्थगन याचिका मंजूर नहीं की जाएगी और बालात्कार से जुड़े केसों में ट्रायल शुरू होने के दो महीने के भीतर इसका फैसला सुनाया जाएगा.


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