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नर्गिस में मरने वालों की संख्या एक लाख

नर्गिस में एक लाख लोगों की मौत

यंगून. 8 मई, 2008
बर्मा में अमरीकी राजनयिक शेरी विलरोजा ने कहा है कि रविवार को तड़के सुबह आए समुद्री तूफान नर्गिस में मरने वालों की संख्या एक लाख से उपर हो सकती है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से देश के अलग-अलग इलाकों से खबरें आ रही हैं, उसके मुताबिक यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.

 

हालांकि बर्मा के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक 22 हजार लोगों के मारे जाने की खबर है और लगभग 50 हजार लोग लापता हैं.

राहत एजेंसी 'सेव दि चाइल्ड' के म्यामार स्थित केंद्र के निदेशक एंड्रयू किर्कवुड का कहना है कि तूफान प्रभावित इलाकों में राहत की रफ्तार बेहद धीमी है. इस तूफान में जो लोग मारे गए हैं, उनके शव सड़ने लगे हैं और अगर जल्दी ही तूफान प्रभावित इलाकों में राहत नहीं पहुंची तो देश में महामारी फैल सकती है.

 

इससे पहले सोमवार को यह आंकड़ा 15 हजार तक बताया गया था. शुरुवाती दौर में इस तूफान में मरने वालों की संख्या 351 बताई गई थी. अधिकारियों का अनुमान है कि कम से कम 50 हजार लोग अभी भी लापता हैं.


बर्मा में आए तूफ़ान की तीव्रता 190 मीटर प्रति घंटा थी. इस तूफान को 'नर्गिस' का नाम दिया गया था.

 

बर्मा के अधिकांश इलाकों में बिजली और संचार सुविधाएं ठप्प हो गई हैं. बिजली के अभाव में कई इलाकों में पानी के लिए भी हाहाकार मचा हुआ है. रंगून के अलावा कारेन, बागो, मोन, इरावदी जैसे बर्मा के अलग-अलग शहरों में हताहतों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इन इलाकों को आपदाग्रस्त घोषित कर सेना और बचाव दल को राहत के काम में लगा दिया गया है. बोगाले जैसे शहर पूरी तरह तबाह हो गए हैं और यहां इक्के-दुक्के घर ही सही सलामत बचे हैं.

 

बचाव औऱ राहत के काम में संयुक्त राष्ट्र का राहत दल भी लगा हुआ है. हालांकि बर्मा की सरकार ने इस राहत दल को कुछ इलाकों में प्रवेश की इजाजत नहीं दी है. ज्ञात रहे कि देश में नए संविधान पर जनमत संग्रह हो रहा है. अनुमान लगाया जा रहा है कि जनमत संग्रह के कारण संयुक्त राष्ट्र के बचाव दल को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है.

 

बर्मा की सरकार ने शनिवार को होने वाले जनमत संग्रह का काम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही संपन्न कराए जाने के संकेत दिए हैं.


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