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मिस्र में फिर क्रांति

मिस्र में फिर क्रांति

काहिरा. 4 जुलाई 2013

राष्ट्रपति मुर्सी


मिस्र में एक बार फिर से हजारों की संख्या में प्रदर्सऩकारी सड़कों पर उतर आये हैं. सेना, मुर्सी विरोधी और समर्थकों की झड़प में कम से कम 16 लोगों के मारे जाने की खबर है. इधर देश का संविधान निलंबित कर राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सेना द्वारा हटाये जाने के पक्ष और विरोध में आम जनता आमने-सामने है. सेना ने अगले आदेश तक राष्ट्रपति की सारी शक्तियां मुख्य न्यायाधीश के पास होने की घोषणा की है. मुर्सी पर आरोप था कि वे देश में कट्टर इस्लामी एजेंडा थोप रहे हैं.

सेना प्रमुख जनरल अब्देल फ़तह अल-सीसी ने कहा कि नए राष्ट्रपति के चुनाव होने तक अंतरिम सरकार का काम मुख्य न्यायाधीश संभालेंगें. इधर मुर्सी को हटाये जाने के बाद दस हजार से ज्यादा लोगों ने तहरीर चौक पर एकत्र होकर जश्न मनाया. सेना के टैंक और तोप पूरे काहिरा में तैनात कर दिये गये हैं.

इससे पहले राष्ट्रपति मुर्सी ने टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा कि वह पारदर्शी तरीके से निष्पक्ष चुनाव के ज़रिए देश के राष्ट्रपति चुने गए हैं और वह मरते दम तक अपने संवैधानिक पद की रक्षा करेंगे. लेकिन उनका भाषण समाप्त होते न होते सेना ने फेसबुक पर फाइनल ओवर यानी अंतिम घंटे का संदेश डाल कर मुर्सी को पद से हटाने की घोषणा कर दी. सेना ने मुर्सी के भाषण के बाद जारी बयान में कहा कि हम अल्लाह की क़सम खाते हैं कि हम किसी आतंकवादी, चरमपंथी या मूर्ख से मिस्र और उसके लोगों को बचाने के लिए अपना ख़ून भी बहा देंगे.

इधर मुर्सी को इस तरह से हटाये जाने को मुर्सी समर्थकों ने तख्तापलट की संज्ञा दी है. उधर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि वह ताज़ा घटनाक्रम को लेकर बेहद चिंचित हैं और उन्होंने जल्द से जल्द नागरिक शासन बहाल करने की उम्मीद जताई है. ओबामा ने मिस्र को मिलने वाली अमरीकी सहायता की समीक्षा करने के लिए भी कहा है. अमरीकी क़ानून के मुताबिक़ जनता के ज़रिए चुने गए नेता को सेना के ज़रिए अपदस्थ करने की स्थिति में मिस्र को मिलने वाली अमरीकी सहायता रोक दी जाती है. माना जा रहा है कि अमरीकी दबाव के बाद मिस्र के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है.


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