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पेप्सी कोला से कैंसर का खतरा

पेप्सी कोला से कैंसर का खतरा

कैलिफोर्निया. 4 जुलाई 2013

पेप्सी


अगर आप पेप्सी पी रहे हैं तो सावधान ! सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल हेल्थ की जांच में एक बार फिर यह तथ्य सामने आया है कि पेप्सी के उत्पादों में बड़ी मात्रा में कैंसरकारी तत्व पाये गये हैं. हालांकि पेप्सी का कहना है कि वह पेप्सी को बनाने का अपना तरीका बदलेगी लेकिन यह बात बहुत साफ है कि तब तक तो उपभोक्ताओं को पेप्सी के पेय पदार्थ के साथ-साथ कैंसर के खतरे को भी गले से नीचे उतारना पड़ेगा.

सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल हेल्थ की जांच में जो तथ्य सामने आये हैं, उसके अनुसार पेप्सी में इस्तेमाल किए गए कैरामेल कलरिंग में अब भी एक कैंसरकारी तत्व गंभीर मात्रा में शामिल है. यह किसी भी आयु वर्ग के उपभोक्ता पर प्रतिकूल असर डालने वाला है. हाल ही में कैलिफोर्निया सरकार ने इन कंपनियों को उत्पादों को लेकर एक कानून पारित किया था, जिसे लेकर पेप्सी और कोका कोला ने कहा था कि वे अपना फार्मूला बदलेंगी.

सरकार ने कोका कोला और पेप्सी को ये साफ निर्देश दिये थे कि अगर कैंसरकारी तत्व इन पेय पदार्थों के लिये अनिवार्य ही हों तो इसे न्यूनतम मात्रा पर रखा जाये. इसके अलावा कानूनन पेप्सी और कोला कंपनी को अपने उत्पादों पर कैंसर की चेतावनी की सूचना भी अनिवार्य रुप से छापने के निर्देश दिये गये हैं.

इससे पहले भारत में भी सेंटर फार साइंस एंड इन्वार्नमेंट ने 12 राज्यों में बिकने वाले 11 अलग-अलग कंपनियों की कोल्ड ड्रिंक्स के 25 उत्पादन प्लांटों से 57 अलग-अलग नमूने लिये थे, जिनकी जांच के बाद पता चला था कि विषैले प्रतिबंधित कीटनाशक की मात्रा पेप्सी में 30 गुना व कोकाकोला में 27 गुना अधिक है. इनमें 3 से 6 तरह के प्रतिबंधित घातक कीटनाशक मिले थे. इतना ही नहीं, इन पेय पदार्थों की जांच के बाद यह बात सामने आई थी कि कीटनाशक की मात्रा कोलकाता के नमूने में 140 गुना एवं ठाणे के नमूने में 200 गुना अधिक मिला. देश भर में शोर-शराबा मचा तो सरकार ने संसद की कैंटिन में इनकी बिक्री रोक दी. मामला कोर्ट तक पहुंचा लेकिन इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.