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मिस्र संकट का असर तेल कीमतों पर

मिस्र संकट का असर तेल कीमतों पर

काहिरा. 5 जुलाई 2013

मोहम्मद मुर्सी


मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सेना द्वारा अपदस्थ किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल दामों में अस्थिरता आने की संभावना बढ़ गई है. मिस्त्र के हालात का मनोवैज्ञानिक असर अभी से ही कच्चे तेल के दामों पर देखा जाने लगा है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें अगस्त मध्य के लिए अभी से ही 100 डॉलर प्रति बैरल की मनोवैज्ञानिक रेखा को पार कर गई है.

हालांकि मिस्र एक तेल उत्पादक देश नहीं है लेकिन तेल परिवाहन के लिए महत्वपूर्ण स्वेज़ नहर उसी की सीमा के अंदर से होकर गुजरती है और राजनीतिक अस्थितरता से इसके द्वारा होने वाले कारोबार पर असर पड़ सकता है.

यदि मानव निर्मित स्वेज नहर न होती तो सऊदी अरब से ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा तथा अमेरिका तेल ले जाने के लिये सूडान, इथोपिया, सोमालिया, केन्या, तंजानिया तथा दक्षिणी अफ्रीका घूम कर जाना होता, जिससे तेल की ढ़ुलाई का खर्च बढ़ जाता. वैसे अंतर्राष्ट्रीय संधि के मुताबिक स्वेज नहर से आवागमन को शांति के आलावा युध्दकाल में भी रोका नही जा सकता है

इसी स्वेज नहर के कारण मिश्र का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत महत्व है और यही वजह है कि दुनिया भर के तेल के प्यासे देशों की नज़र मिस्त्र में चल रहे राजनीतिक संकट पर है और वे दम साधे देख रहे हैं कि आगे हालात क्या होते हैं.