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तोते का पता बताने से बेहतर जेल जाना

तोते का पता बताने से बेहतर जेल जाना

मेलबर्न. 7 जुलाई 2013. बीबीसी

night parrot


ऑस्ट्रेलिया के एक प्रकृतिविद् ने अपने कैमरे में ऐसे दुर्लभ तोते की तस्वीर और आवाज कैद की है जो निशाचर प्रकृति का है. माना जा रहा है कि इस तोते को 100 साल बाद देखा गया है. पक्षियों की खोज-खबर रखने वाले इस प्रकृतिविद् का नाम जॉन यंग है. उन्होंने इस तोते का वीडियो लिया और उसकी आवाज भी रिकार्ड की. इस तोते को ‘पेजोपोरस आक्सिडेन्टलाइज’ के नाम से जाना जाता है. यंग का कहना है कि वो ये नहीं बताएंगे कि उन्हें ये हरा और पीला तोता कहां मिला, चाहे उन्हें जेल ही जाना क्यों न पड़े.

युंग का कहना है कि वे नहीं चाहते की इस तोते का पता बताने पर क्वींसलैंड के 'लेक आयर' बेसिन के उस दूरदराज वाले रेतीले इलाके में पक्षी प्रमियों का जमावड़ा लगने लगे इन तोतों का पता लगाने के लिए कई साल तक अभियान चलाए गए. इनमें पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में 'लेक डिसअप्वॉन्टमेंट' झील के इर्द-गिर्द चला मशहूर अभियान भी शामिल है जो विफल रहा था.

विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके और दुनिया के सबसे रहस्यमयी पक्षियों में से एक माने जाने वाले इन तोतों के बारे में वैज्ञानिकों के पास बहुत ही कम जानकारी है. तोते की इस प्रजाति के अधिकांश जिंदा नमूने 19वीं शताब्दी में पाए गए थे. दुनिया भर में विभिन्न संग्रहालयों में इनकी मृत देह को संरक्षित कर रखा गया है.

स्वभाव से शर्मीले माना जाने वाले इन तोतों पर पक्षीविज्ञानी मोहित हैं. कुछ तो इसलिए मोहित हैं कि यह एक दुर्लभ प्रजाति का पक्षी है. माना जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में इन तोतों की संख्या लगभग 250 हो सकती है. इन तोतों की गिनती घट रही है. इसका कारण जंगली बिल्ली और लोमड़ियों को माना जा रहा है, जो उनका शिकार कर लेती हैं.

पिछले 100 सालों में इन निशाचर तोतों के मिलने की अपुष्ट खबरें मिलीं हैं. एक बार ऐसे दो तोते मिले थे, लेकिन वे मरे हुए थे. इस पक्षी के विलुप्त हो जाने की आशंकाएं जताई जाती रही हैं. और अब यंग जो खुद को प्रकृति के रहस्यों की थाह में लगा गल का जासूस बताते हैं अपने साथ ऐसी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग लाए हैं जिसके बारे में उनका कहना है कि यह उस निशाचरी तोते के जिंदा होने का प्रमाण है. उनकी बात से कई विशेषज्ञ सहमत दिख रहे हैं.


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