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डायक्लोफेनिक इंजेक्शन पर बैन संभव

डायक्लोफेनिक इंजेक्शन पर बैन संभव

नई दिल्ली. 8 जुलाई 2013

डायक्लोफेनिक इंजेक्शन


पशुओं को दर्द से राहत देने के लिये लगाये जाने वाले डायक्लोफेनिक इंजेक्शन पर निकट भविष्य में भारत मे बैन लगने की संभावना है. भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड को दर्द की इस दवा और गिद्धों के मौतो बीच संबंध पर अध्ययन करने के लिये कहा गया है. इसके लिये एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है.

गौरतलब है कि दिल्ली की एक गैर-सरकारी संगठन ग्रीन इंडियन स्टेट्स ट्रस्ट ने सरकार से गुहार की थी कि दर्द की दवा डायक्लोफेनिक के इंजेक्शन से भारत में गिद्धों की मौते हो रही हैं. इस कारण इस पर बंदिश लगा दी जाये. डायक्लोफेनिक एक सस्ता तथा अधिक उपयोग में लाया जाने वाला दर्द निवारक इंजेक्शन है. यह मनुष्यों के अलावा पशुओं को भी लगाया जाता है.

यदि किसी पालतू पशु को यह इंजेक्शन लगाया गया हो तथा कुछ ही दिनों में यदि उसकी मृत्यु हो जाये तो उसके शरीर में इसके अंश रह जाते हैं. जब गिद्ध इन मरे हुए पशुओं को खाते है तो दवा के प्रभाव से उनकी मौत हो जाती है. कहा जाता है कि इस डायक्लोफेनिक इंजेक्शन के कारण ही भारत तथा पाकिस्तान में गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आयी है. इससे प्राकृतिक पारिस्थिकीय बिगड़ता जा रहा है.

1990 से इस दवा का भारत में प्रचलन है. जिसके तीन मिलीलीटर की मात्रा मनुष्यों को लगाई जाती है. इस डायक्लोफेनिक का बहु खुराक वाला उत्पाद बाजार में उपलब्ध है. इससे कम पैसे में मनुष्यों का इलाज होता है. लेकिन बड़ी मात्रा में इन इंजेक्शनों का दुरुपयोग होता है. इसका उपयोग पालतू पशुओं को दर्द से राहत दिलाने के लिये किया जाता है.


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