पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति > Print | Share This  

उग्रवादी भागवत पर चले राष्ट्रद्रोह का मामला: जदयू

उग्रवादी भागवत पर चले राष्ट्रद्रोह का मामला: जदयू

पटना. 23 जुलाई 2013

mohan bhagwat


बिहार के कृषि मंत्री और जद(यू) के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें उग्रवादी करार दिया. उन्होंने कहा कि भागवत का यह कहना कि देश की एकता एवं अखंडता सिर्फ हिन्दुत्व से ही बनी रह सकती है, भारत के संविधान का खुला मजाक है और ऐसे बयान देने वाले के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए. उन्होने आरएसएस को प्रतिबंधित करने की भी मांग की.

पटना में संवाददाताओं से बात करते हुए सिंह ने कहा कि संविधान की मूल भावना में एक लोकतांत्रिक, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य और कल्याणकारी सरकार के गठन की परिकल्पना समाहित है. एक तरह तो हम धर्मनिरपेक्षता और पंथनिरपेक्षता की बात कर रहे हैं और दूसरी तरह कुछ लोग एक पंथ या धर्म को संकट मोचक बता रहे हैं. यह तो मेरी समझ में उग्रवादी और देशद्रोही बातें हैं.

यहीं नहीं सिंह ने भागवत की तुलना खालिस्तानियों से भी की और कहा कि जिस तरह से उनके आंदोलन देश को तोड़ते थे, उसी तरह से भागवत ऐसे बयानों से देश की अखंडता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. इसलिए उनके खिलाफ आपराधिक और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोप में मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

नरेंद्र सिंह ने कुछ समय पहले तक जद यू की सहयोगी पार्टी रही भाजपा को सांप्रदायिकता बढ़ाने वाली पार्टी बताते हुए कहा कि वे देश के तमाम लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष लोगों से अपील करते हैं कि वे देश को ऐसे धार्मिक उन्माद से बचाने का प्रयास करें.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Sania Hasan [] Lucknow - 2013-07-27 10:52:50

 
  हिन्दू और आर्य एक की शब्द के अर्थ है सिन्धु घाटी की सभ्यता का अपभ्रंस रूप ही हिन्दू है, हिन्दू कोई मजहब नही है इसके पांच पंथ है 1- सनातन 2- आर्या समाज 3- सिख 4- बौध 5- जैन, हिन्दू संस्कृति के सभी मानने वाले अपने पंतके अनुसार अपने धार्मिक पूजा अर्चना करते है. अखण्ड हिंदुस्तान भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफग़ानिस्तान नेपाल, सभी को लेकर है इस्लाम भी एक पन्त है जो की अखंड हिन्दुस्तान के भीतर समाहित है, केवल नमाज़ की विधि अलग है बाकी आर्या समाज पंत की ही तरह नमाज़ अदा करते है. हिन्दू एक संस्कृति है और हिन्दुस्तान मे रहने वाले सभी इस्लामिक हिन्दू से ही धर्म परिवर्तन किये हुये है, मोहम्मद साहिब बिहार के नालन्दा विश्वविडलया से आर्या धर्मा की शिक्षा लेकर गये और पैगंबेर की प्रेरणा से पाक कुर्रान के अनुसार सभी पंथो की आयते अरबी भाषा मे लाई गयी, हिन्दुस्तान की संस्कृति मे सभी मज़हब का उदय पाक वेदो से हुआ है इसलिये हिन्दू शब्द पाक है और हम सभी को हिन्दू कहने मे फक्र महसूस होता है. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in