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बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बीसीसीआई की चुनौती

बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बीसीसीआई की चुनौती

नई दिल्ली. 5 अगस्त 2013

बीसीसीआई


भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने बॉम्बे हाई कोर्ट के इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाज़ी के मामले की जांच के लिए गठित दो सदस्यीय समिति को 'अवैध और असंवैधानिक' करार देने के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है.  बीसीसीआई ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायलय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है.

गौरतलब है कि 28 जुलाई को कोलकाता में बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक हुई थी. उस बैठक में बोर्ड की दो सदस्यीय जांच समिति ने आईपीएल में सट्टेबाजी मामली की रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बोर्ड अध्यक्ष एन.श्रीनिवासन के दामाद और चेन्नई सुपरकिंग्स टीम के प्रिंसिपल गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रायल्स टीम के सहमालिक राज कुंद्रा को सट्टेबाजी के आरोपों में क्लीन चिट दे दी थी.

इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने 30 जुलाई को बीसीसीआई द्वारा गठित समिति को अवैध करार दिया था. न्यायालय ने बिहार एवं झारखंड क्रिकेट संघों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस समिति के गठन पर भी सवाल खड़े किए थे और कहा था कि इस मामले की नए सिरे से जांच की जरूरत है.


बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि बीसीसीआई मैच और स्पॉट फिक्सिंग जैसे गम्भीर मामलों की जांच खुद कैसे करा सकता है. उसे इन मामलों की सुनवाई के लिए समिति गठित करने का कोई अधिकार नहीं है.

बीसीसीआई की इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर. बालासुब्रमण्यन और जयराम टी. चौटा शामिल थे. ये पी. रमन के करीबी हैं जिन्हें गुरुनाथ मयप्पन के वकील के तौर पर जाना जाता है.


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