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एमपी में फिर गीता पर महाभारत

एमपी में फिर गीता पर महाभारत

भोपाल. 5 अगस्त 2013

शिवराज सिंह चौहान


मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सिंह सरकार ने मदरसों में गीता पढ़ाया जाना अनिवार्य कर दिया है. विधानसभा चुनावों से मात्र चार महीने पहले लिए गए इस फैसले ने बड़ा विवाद पैदा कर दिया है और राज्य सरकार पर शिक्षा के भगवाकरण के आरोप लगने लगे हैं. कई धार्मिक संगठनों ने भी इस फैसले का पुरजोर विरोध किया है.

राज्स सरकार ने कक्षा 1 और 2 की विशिष्ट उर्दू व विशिष्ट अंग्रेजी की किताब में इसी शैक्षिक सत्र से गीता प्रसंग का एक अध्याय जोड़ने की अधिसूचना जारी कर दी है. इसके अलावा कक्षा तीसरी से लेकर कक्षा आठवीं तक सामान्य हिंदी में भी गीता के कुछ प्रसंगों को पढ़ाया जाएगा. इसके लिए राज्य के पाठ्य पुस्तक अधिनियम में बकायदा जरूरी बदलाव भी किए गए हैं.

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी शिवराज सिंह सरकार ने साल 2011 में गीता को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने घोषणा की थी जिसके कारण उसे काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी.

अभी भी सरकार के इस फैसले का काफी विरोध हो रहा है. मध्य प्रदेश कैथलिक काउंसिल के प्रवक्ता फादर जानी पीजे ने कहा है कि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में यह फैसला उचित नहीं है और यदि सरकार की नीयत साफ है तो वो बाइबल और कुरान जैसे धर्मग्रंथ भी पाठ्यक्रम में शामिल करे. मध्य प्रदेश लोक संघर्ष साझा मंच के सचिव जावेद अनीस ने कहा है कि हम शिक्षा में धर्म के घालमेल के खिलाफ रहे हैं. इसका मासूम बच्चों के दिलो-दिमाग पर बुरा असर पड़ेगा.


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