पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >उ.प्र. Print | Share This  

अल्पसंख्यकों को यूपी में 20 प्रतिशत कोटा

अल्पसंख्यकों को यूपी में 20 प्रतिशत कोटा

लखनऊ. 21 अगस्त 2013

अखिलेश यादव


उत्तरप्रदेश में अखिलेश सरकार ने कम से कम 30 विभागों में अल्पसंख्यकों को 20 प्रतिशत कोटा तय करने के निर्देश दिये हैं. इसका लाभ 85 योजनाओं में अल्पसंख्यकों को मिलेगा. जिन इलाकों में 25 फीसदी आबादी अल्पसंख्यकों की है, वहां इस फैसले पर सख्ती से अमल किया जायेगा.

सरकार ने जो निर्णय लिया है, उसके अनुसार कृषि, गन्ना विकास, लघु सिंचाई, उद्यान, पशुपालन, कषि विपणन, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, लोक निर्माण, सिंचाई, ऊर्जा, लघु उद्योग, खादी ग्रामोद्योग, रेशम विकास, पर्यटन, बेसिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, युवा कल्याण, नगर विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, पिछड़ा वर्ग कल्याण, व्यावसायिक शिक्षा, समाज कल्याण, विकलांग कल्याण, महिला कल्याण, दुग्ध विकास, समग्र ग्राम विकास में कोटा का लाभ अल्पसंख्यकों को मिलेगा.

सरकार का यह निर्णय ठीक-ठीक लागू हो, इसके लिये कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जायेगी, जो इस पर नजर रखेगी. इन कमेटियों में अल्पसंख्यक समुदाय के 2-2 सदस्य भी रहेंगे.

इस मुद्दे पर वरिष्ठ समाजवादी नेता और मंत्री आजम खान ने कहा कि सच्चर कमेटी की अनुशंसाओं को ध्यान में रख कर ये योजनायें बनाई गई हैं. आजम खान ने कहा कि प्रदेश में अल्पसंख्यक और खासतौर पर मुसलमानों की स्थिति ठीक नहीं है. उनका सामाजिक-आर्थिक स्तर काफी पिछड़ा है, ऐसे में यह फैसला उनका जीवन स्तर बदलने का काम करेगा.

अखिलेश यादव का फैसला ऐसे समय में आया है, जब यह बात भी सामने आई है कि नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन यानी एनएसएसओ के एक अध्ययन 'भारत के बड़े धार्मिक समूहों में रोज़गार और बेरोज़गारी की स्थिति' में पता चला है कि मुसलमानों का जीवनस्तर सबसे नीचे है. एनएसएसओ के सर्वे के मुताबिक मुसलमानों का औसत प्रति व्यक्ति प्रति दिन खर्च सिर्फ़ 32.66 रुपए है.

इस सर्वे के अनुसार मुसलमानों का ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति परिवार औसत मासिक खर्च 833 रुपए है जबकि हिंदुओं के लिए ये आंकड़ा 888, ईसाइयों के लिए 1296 और सिखों के लिए 1498 है. वहीं शहरी इलाकों में भी मुसलमानों का प्रति परिवार औसत मासिक खर्च सबसे कम 1272 रुपए था जबकि हिंदुओं का 1797, ईसाइयों का 2053 और सिखों का 2180 रुपए था. जाहिर है, ऐसे में अखिलेश सरकार का यह फैसला अल्पसंख्यकों के लिये एक बड़ी राहत की तरह होगा.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in