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बढ़े रेपो रेट से महंगा होगा ऋण

बढ़े रेपो रेट से महंगा होगा ऋण

नई दिल्ली. 20 अगस्त 2013

आरबीआई


भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपनी मुख्य नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की वृद्धि कर दी है. देश के केंद्रीय बैंक के इस अप्रत्याशित कदम से आवास, वाहन तथा अन्य प्रकार के ऋण महंगे हो जाएंगे. बैंक के कदम से रुपये के साथ-साथ गुरुवार को तीन साल के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और अन्य शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई.

आरबीआई के नए गवर्नर रघुराम राजन ने पहली बार वित्त वर्ष 2013-14 की मध्य तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में अपने पूर्ववर्ती डी. सुब्बाराव द्वारा लिए गए फैसलों को आंशिक रूप से वापस लिया. राजन ने चार सितंबर 2013 को आरबीआई गवर्नर का पद संभाला था.

राजन ने रेपो दर को 0.25 फीसदी बढ़ा कर 7.5 फीसदी कर दिया. रेपो दर वह दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं.

इसके साथ ही रिवर्स रेपो दर को भी 6.25 फीसदी से बढ़ा कर 6.5 फीसदी कर दिया गया. रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है, जो आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पावधिक जमा पर देता है.

रेपो दर और रिवर्स रेपो दर के आधार पर वाणिज्यिक बैंक उपभोक्ताओं के लिए दर तय करते हैं. इनके बढ़ने से आवास, वाहन तथा अन्य प्रकार के ऋण पर लगने वाली ब्याज दरें बढ़ जाएंगी जिसकी पहले ही बढ़ी हुई महंगाई पर और नकारात्मक असर होगा.

आरबीआई के फैसले का शेयर बाजारों पर नकारात्मक असर हुआ और बंबई स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 382.93 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. रुपया भी फिसलकर डॉलर के मुकाबले 62.61 तक पहुंच गया.

नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) को चार फीसदी के स्तर पर बरकरार रखा गया है. सीआरआर धन का वह अनुपात है, जो वाणिज्यिक बैंकों को रिजर्व बैंक के पास रखना होता है.

आरबीआई ने सीमांत स्थाई सुविधा (एमएसएफ) दर को तत्काल प्रभाव से 75 आधार अंक घटाकर 10.25 फीसदी से 9.5 फीसदी कर दिया.

गवर्नर राजन ने मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रिजर्व बैंक ने विकास और महंगाई के विकल्पों बीच संतुलन साधने की कोशिश की है. उन्होंने कहा, "रिजर्व बैंक की प्राथमिकता हमेशा से ही महंगाई और विकास दोनों रही है."
 


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