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राइट टू रिजेक्ट पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं

राइट टू रिजेक्ट पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं

नई दिल्ली. 28 सितंबर 2013

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सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मतदाताओं को प्रत्याशियों को खारिज करने का अधिकार दिए जाने पर राजनीतिक दलों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आई हैं. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का जहां कई राजनीतिक दलों ने स्वागत किया, वहीं कुछ नेताओं ने इस पर असंतोष भी जाहिर किया. कई राजनीतिक दलों ने इसे भारतीय राजनीति पर दूरगामी असर डालने वाला बताया है.

उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने इस ऐतिहासिक फैसले में कहा कि मतदाताओं को चुनाव में ईवीएम और मतपत्रों पर 'इनमें से कोई नहीं' विकल्प का इस्तेमाल कर सभी प्रत्याशियों को नकारने का अधिकार दिया जाना चाहिए. अदालत ने साफ किया कि इससे जहां लोगों की मतदान प्रक्रिया में हिस्सेदारी बढ़ेगी, वहीं राजनीतिक दलों पर सही प्रत्याशी पेश करने का जनदबाव बढ़ेगा.

कांग्रेस के मीडिया सेल के प्रमुख अजय माकन ने कहा, "सैद्धांतिक रूप से हमें कोई इससे कोई समस्या नहीं है, लेकिन कुछ मुद्दे हैं जिसके लिए हम पूरे फैसले का अध्ययन करना चाहते हैं."

उन्होंने हालांकि यह भी कहा, "इस फैसले में कुछ भी नया नहीं कहा गया है, क्योंकि इससे पहले भी जो लोग किसी को नहीं पसंद करते थे वे मतदान करने नहीं जाते थे. अब वे मतदान केंद्रों तक जाएंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे."

गुजरात के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में कहा है, "मैं पूरे हृदय से इसका स्वागत करता हूं. मुझे पूरा भरोसा है कि इसका हमारी राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा और हम चुनाव सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकेंगे जिससे हमारा लोकतंत्र और ज्यादा जीवंत और भागीदारी वाला हो सकेगा."

आम आदमी पार्टी (आप) ने नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने कहा, "हम इस फैसले का स्वागत करते हैं. यह चुनाव सुधार की प्रक्रिया में बड़ा कदम है, लेकिन यह सिर्फ पहला कदम है."

जनता दल (युनाइटेड) के नेता के. सी. त्यागी ने कहा, "मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं. लोगों को खारिज करने का अधिकार मिलना चाहिए. यह देश के मतदाताओं को और अधिकार संपन्न बनाएगा."

फैसले को चुनाव सुधार का 'मामूली' पहलू करार देते हुए वामपंथी दलों ने धनबल और बाहुबल पर अंकुश लगाने सहित चुनाव संबंधी कानून में समग्र बदलाव की मांग की.

मार्क्सगवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो ने अपने बयान में कहा है, "माकपा हमेशा से समग्र चुनाव सुधार का पक्षधर रही है, लेकिन इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दे को सरकार ने अभी तक संसद के समक्ष पेश नहीं किया है."

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने संवाददाताओं से कहा, "हम फैसले का स्वागत करते हैं. बाबासाहेब अंबेडकर हमेशा इसके पक्ष में थे."

दूसरी ओर कोलकाता में लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने यहां संवाददाताओं से कहा, "मैं नहीं समझता कि सर्वोच्च न्यायालय को कानून बनाने का अधिकार है. ईवीएम पर क्या हो, यह तय करना पूरी तरह से नेताओं पर निर्भर है. सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है और उसका आदर करना लाजिमी है, लेकिन एक नागरिक के रूप में मैं इसे जरूरी नहीं मानता."

तृणमूल कांग्रेस के नेता और पश्चिम बंगाल के पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने आदेश को 'निर्थक' बताया, वहीं पार्टी के सांसद और पूर्व केंद्रीय शहरी विकास मंत्री सौगत राय ने फैसले का स्वागत किया.

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