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राहुल ने किया अध्यादेश पर नाटक?

राहुल ने किया अध्यादेश पर नाटक?

नई दिल्ली. 28 सितंबर 2013

राहुल गांधी


राहुल गांधी ने अपराधियों पर सरकार के अध्यादेश को लेकर जो कुछ किया, उस पर सवाल खड़े होने लगे है. आरोप लगाया जा रहा है कि यह सब कुछ पहले से ही तय था. राहुल गांधी ने ऐसे समय पर प्रेस कांफ्रेंस करके सरकारी विधेयक का विरोध किया है, जब अध्यादेश पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अपनी नाराजगी जताने वाले थे.

गौरतलब है कि शुक्रवार को राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुये यहां तक कह दिया कि केंद्र सरकार द्वारा दागी जनप्रतिनिधियों की सदस्यता बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश को फाड़कर फेंक देना चाहिए.

राहुल गांधी ने कहा कि यह समय इस बकवास को रोकने का है. मेरे विचार से अध्यादेश पूरी तरह बकवास है और इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए. राहुल गांधी ने कहा कि यह अध्यादेश एक राजनीतिक विचार विमर्श का परिणाम है और इस समय मेरी पार्टी सहित सभी दलों को इस तरह के समझौते रोक देने चाहिए.

राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना करते हुये कहा कि जैसे तर्क दिए जा रहे हैं और मेरे संगठन में भी जिस तरह से बहस हुई है और मैंने सुना है कि ऐसा राजनीतिक मजबूरियों के कारण करने की जरूरत है. सभी ऐसा करते हैं, कांग्रेस ऐसा करती है, भाजपा ऐसा करती है, जनता दल ऐसा करती है, समाजवादी पार्टी ऐसा करती है. चाहे कांग्रेस हो या भाजपा हम ऐसे छोटे समझौते जारी नहीं रख सकते.

उन्होंने कहा कि मेरी इसमें रुचि नहीं है कि विपक्ष के नेता क्या कह रहे हैं. मेरी इसमें रुचि नहीं है कि कांग्रेस पार्टी क्या कर रही है. मेरा निजी तौर पर मानना है कि सरकार ने यह अध्यादेश लाकर गलती की है और इसे वापस लिया जाना चाहिये.

इधर राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने जो कुछ किया, वह सब कुछ सोचा-समझा नाटक था. आरोप है कि सरकार इस बात से डरी हुई थी कि कहीं ऐसा न हो कि राष्ट्रपति अध्यादेश लौटा दें. अगर ऐसा होता तो सरकार की पूरी फजीहत होती. ऐसे में राहुल गांधी का विरोध इस बात को दर्शाने के लिये सामने आया कि कांग्रेस इस अध्यादेख के खिलाफ है. मतलब ये कि किसी भी हालत में कांग्रेस के पास वाहवाही लूटने का अवसर रहे.


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