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चिठ्ठी से बैकफुट पर अखिलेश सरकार

चिठ्ठी से बैकफुट पर अखिलेश सरकार

लखनऊ. 12 अक्टूबर 2013

अखिलेश यादव


अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए बैठक से संबंधित चिठ्ठी पर मचे बवाल के बाद अखिलेश यादव सरकार बैकफुट पर आ गई है. यूपी सरकार ने मंदिर बनवाने की मंशा से इंकार किया है और इस मसले पर सफाई देते हुए कहा है कि छपाई की गलती की वजह से यह भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है. सरकार ने कहा है कि अब इस गलती को सुधार लिया गया है.

दरअसल मामला उत्तर प्रदेश सरकार के एक आधिकारिक पत्र का है जो कि राज्य के सचिव सर्वेश चंद मिश्रा के नाम से जारी हुआ था. इस पत्र के विषय में लिखा था, “सोमनाम मंदिर पुनर्निमाण की तरह ही श्री रामजन्मभूमि पर भी भारत सरकार संसीदय कानून बनाकर मंदिर निर्माण के संबंध में”. इस चिठ्ठी में फैजाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जिला मजिस्ट्रेट को बैठक के लिए बुलाया गया है.

इस चिठ्ठी के बाहर आते ही उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक एवं राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई थी. सबसे ज्यादा विवाद प्रशासनिक अमले द्वारा चिठ्ठी में अयोध्या के विवादित स्थल को श्री रामजन्मभूमि बताए जाने से हो रहा था क्योंकि आमतौर पर इस तरह की भाषा आरएसएस या भाजपा द्वारा की जाती रही है जिनके लिए यह मुख्य चुनावी मुद्दा है. इसके अलावा सोमनाथ का उदाहरण भी भाजपा द्वारा बार-बार दिया जाता रहा है.

चिठ्ठी के बाहर आने के बाद इसे समाजवादी पार्टी द्वारा भाजपा के चुनावी मुद्दे को हाईजैक करने से जोड़कर भी देखा जा रहा था. हालांकि अखिलेश यादव सरकार ने इसे अब छपाई की भूल बताते हुए इससे पल्ला झाड़ने की कोशिश की है. सरकार का कहना है कि बैठक विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की संकल्प रैली के मद्देनज़र बुलाई गई थी लेकिन विषय में गलती हो जाने से भ्रम की स्थिति पैदा हुई.

मामले के तूल पकड़ने के बाद विपक्षी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा दोनों ने समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है. एक तरफ तो भाजपा ने कहा है कि इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि सपा सरकार वोट बैंक के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार है, वहीं कांग्रेस ने कहा है कि अखिलेश सरकार को विहिप समेत कई लोग चला रहे हैं और इस सरकार के इरादे ठीक नहीं है.
 


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