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खजाने की पहली झलक मिली

खजाने की पहली झलक मिली

उन्नाव. 21 अक्टूबर 2013

उन्नाव में खजाना


उन्नाव के डौंडिया खेड़ा गांव में राजा राव राम बख्श सिंह का खजाने को लेकर लोगों की उत्सुकता उस दीवार को लेकर बढ़ गई है, जिसके दिखाई देने का दावा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने किया है. लोग मान कर चल रहे हैं कि यह खजाने की पहली झलक है. वहीं आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि उसने यह खुदाई सोने या खजाने के लिये नहीं शुरु की है, बल्कि उनका ध्यान केवल एक प्राचीन सभ्यता को जानने तक सिमित है. हजार टन सोने के खजाने की मूर्खतापूर्ण तलाश पर लोगों का निगाहें सोमवार पर टिकी हुई हैं.

इधर इस कथित खजाने को सपने में देखने का दावा करने वाले संत शोभन सरकार ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर मोदी पर बिना तथ्यों के बयानबाजी का आरोप लगाया है. नरेंद्र मोदी ने चेन्नई की एक सभा में कहा था कि इस कथित खजाने की खुदाई से दुनिया में भारत का नाम खराब हो रहा है और भारत की बेइज्जती हो रही है.

पिछले चार दिनों से इस कथित खजाने की खोज में खुदाई चल रही है.तीन दिन तक तो कहीं से कोई उम्मीद नज़र नहीं आई लेकिन तीसरे दिन की शाम को खुदाई के दौरान एक कथित दीवार का कोना नज़र आने के बाद लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है. लोगों ने उम्मीद जताई है कि इसी दीवार के पीछे कथित खजाना हो सकता है.

इस कथित खजाने की मूर्खतापूर्ण उद्देश्यों से की जा रही खुदाई में 22 मज़दूर लगाये गये हैं.इन मज़दूरों ने अभी तक 3 फूट की खुदाई की है. सपने में खजाना देखने का दावा करने वाले शोभन सरकार का कहना है कि खजाना 25 फूट नीचे है.लेकिन किसी जगहंसाई से बचने के लिये एएसआई अब इस बात से पल्ला झाड़ रही है कि वह किसी खजाने की तलाश कर रही है.

असल में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि राजा राव राम बख्श सिंह इतने बड़े राजा नहीं थे कि उनके पास हजार टन सोना हो. एक छोटी सी रियासत में अगर इतना खजाना होता तो अब तक कम से कम अंग्रेज़ इस खजाने को नहीं छोड़ते.ऐसे में वैज्ञानिक और इतिहासकार कथित खजाने की इस खुदाई को संता-बंता के चुटकुले से अधिक नहीं मान कर चल रहे हैं. हालांकि मानने वालों का कहना है कि राजा राव राम बख्श सिंह की 600 साल पुरानी रियासत उनके पिता की थी और उन्होंने यह खजाना कई दूसरे लोगों से एकत्र किया था.