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ट्रेनों पर नक्सली हमले का सबब

ट्रेनों पर नक्सली हमले का सबब

पटना. 1 दिसंबर 2013

नक्सली हमला


बिहार में एक के बाद एक ट्रेनों पर हुये नक्सली हमलों ने रेल सुरक्षा की पोल खोल कर रख दी है. रेलवे लगातार सुरक्षा का दावा करती रही है लेकिन नक्सली जिस तरीके से रेलगाड़ियों और स्टेशनों पर हमला कर रहे हैं, वह बताता है कि रेलवे के दावे महज खानापूर्ति हैं. झारखंड और बिहार में नक्सलियों के लिये रेलवे आसान निशाना है और नक्सली ट्रेनों का अपहरण तक करते रहे हैं.

शनिवार को हमले के बाद पुलिस ने राज्य भर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. नक्सलियों की तलाश में पुलिस की टीम छापामारी कर रही है. गौरतलब है कि इस नक्सली हमले में रेलवे पुलिस के तीन जवान मारे गये थे. इस हमले में पुलिस के तीन जवान समेत एक यात्री भी घायल हो गया, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार मुंगेर ज़िले के जमालपुर स्टेशन से पहले नक्सलियों ने साहेबगंज-पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस की महिला बोगी में बैठे पुलिस के जवानों पर हमला कर दिया. नक्सलियों ने पहले तो पुलिकर्मियों पर चाकू से हमला किया, उसके बाद गोलीबारी की.

पुलिस के जवान महिला बोगी में क्यों बैठे थे और चाकूबाजी की घटना के बाद कौन सी परिस्थितियों में में वे जवाबी कार्रवाई नहीं कर पाये, इस मुद्दे पर पुलिस चुप है. हमले के बाद नक्सली तीन इंसास रायफलें, एक कार्बाइन और एक एके-47 बंदूक भी लूट कर चले गये.

इस हमले में मारे गये जवानों में रेल पुलिस के हवलदार अशोक कुमार, बीएमपी के उदय कुमार यादव और भोला कुमार ठाकुर शामिल हैं. इधर इस घटना के बाद पुलिस ने पूरे इलाके में छापामारी की कार्रवाई शुरु कर दी है. पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच की जाएगी और सुरक्षा के मामले की चूक को लेकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी. लेकिन अब तक के इसी तरह के दावे बताते हैं कि आज तक इस तरह के मामलों में पुलिस किसी भी नक्सली को सबूतों के साथ गिरफ्तार कर पाने में असफल ही रही है.


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