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जुवेनाइल एक्ट पर केंद्र को नोटिस

जुवेनाइल एक्ट पर केंद्र को नोटिस

नई दिल्ली. 2 दिसंबर 2013

सुप्रीम कोर्ट


सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के एक प्रावधान को खत्म करने की मांग को दायर की गई याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया है. इस नोटिस के तहत आपराधिक न्यायालयों में नाबालिग अपराधियों पर सुनवाई नहीं की जा सकती.

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.एस.चौहान और न्यायमूर्ति एस.ए.बोबडे की पीठ ने वकील अमन हिंगोरानी की याचिका के जवाब में यह नोटिस जारी किया है.

हिंगोरानी द्वारा दाखिल इस याचिका में न्यायालय से कहा गया था कि धारा 82 और 83 के तहत नाबालिग के मामले की सुनवाई कर रहे दंडाधिकारी सिर्फ उसके 18 साल से ऊपर या नीचे होने की जांच कर सकते हैं और इस आधार पर ही मामले को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड या निचली अदालत को सुनवाई के लिए सौंपते हैं.

इस कानून के तहत 16 से 18 साल के बच्चों को राहत मिली हुई है. हिंगोरानी ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दंडाधिकारी को अरोपी की मानसिक परिपक्वता और अपराध के परिणाम के संबंध में उसकी समझ को भी ध्यान में रखना चाहिए.

वह 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई युवती के पिता की तरफ से न्यायालय में उपस्थित हुए थे. इस मामले पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भी नोटिस जारी किया गया है.


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