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लड़कियों से बात करने में डरता हूं: अबदुल्ला

लड़कियों से बात करने में डरता हूं: अबदुल्ला

श्रीनगर. 6 दिसंबर 2013

फारुख अबदुल्ला


केंद्रीय मंत्री फारुख अबदुल्ला ने कहा है कि उन्हें लड़कियों से बात करने में इसीलिए डर लगता है कि वे ऐसा कर के कहीं जेल न पहुँच जाए. इस बयान पर बवाल मचने के बाद अबदुल्ला ने माफी भी मांग ली है.

दरअसल पूर्व जस्टिस अशोक गांगुली पर लगे यौन उत्पीड़न के मामले में मीडिया को प्रतिक्रिया देते हुए अबदुल्ला ने शुक्रवार को मीडिया से कहा, “अब तो ये हालत हो गई है कि आजकल लड़की से बात करने में भी डर लगने लगा है. बल्कि हम तो समझते हैं कि हम में से अब किसी को सेक्रेटरी ही नहीं रखनी है लड़की. खुदा-ना-खास्ता हमारे खिलाफ शिकायत न हो जाए और हम ही जेल न पहुंच जाएं.”

इसके बाद जब रिपोर्टर द्वारा उनसे ये पूछा गया कि क्या वे इसके लिए लड़कियों को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं तो अबदुल्ला ने कहा कि मैं इसके लिए लड़कियों को नहीं बल्कि समाज को जिम्मेदार ठहरा रहा हूं. उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि, “हिंदुस्तान में ऐसी घटनाएं बढ़ गई हैं. क्योंकि औरतों की संख्या में कमी आई है, घर में अगर लड़का पैदा होता है तो हम खुश होते हैं. वहीं लड़की के होने पर रोने लगते हैं, जबकि लड़कियों का भी समाज में होना बहुत जरूरी है”

अबदुल्ला द्वारा मीडिया में दिए इस वक्तव्य को लेकर विवाद ख़ड़ा हो गया और सोशल मीडिया पर मौजूद लोगों से लेकर महिला संगठनों ने इसके लिए अबदुल्ला पर जमकर निशाना साधा. फारुख अबदुल्ला के बेटे और राज्य के मौजदा मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने भी ट्विटर के जरिए कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे को हल्के में लेकर यह बयान नहीं दिया गया है और उन्हें ये उम्मीद है कि उनके पिता इस पर माफी मांगेंगे.  उल्लेखनीय है कि इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने भी तेजपाल मामले के सामने आने के बाद विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि अब कोई लड़कियों को नौकरी पर नहीं रखना चाहेगा.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

mfk [mfk02013@gmail.com] india - 2013-12-06 14:41:49

 
  श्री फारुख जी ने सही कहा है. पुरुष समाज के दिल की बात कही है. इसमें गलत क्या है.
वर्तमान में महिलायों से ज्यादा पुरुष असुरक्षित है. हम महिलायों पर हो रहे अपराधो की निंदा करते है. और सजा दिलवाना चाहते है. लेकिन नए कानून से सभ्य पुरुष समाज पर आरोप लगाकर कोई भी अपनी दुश्मनी निकल सकता है. क्या कारण है की नए कानून आने के बाद ही ऐसे केसों की संख्या बड़ी है. जो एक चिंता का विषय है. इस पर राजनीति नहीं होना चाहिये क्या काग्रेस बीजेपी व् अन्य दलों को पुरुष समाज के वोट नहीं चाहिये. जो पार्टी पुरुष समाज के हित की बात करेगा वोट उसी को मिलेगा. पुरुषो यदि आज हम नहीं जागे तो भविष्य में नए कानून के आरोप आप पर भी लग सकते है. हम सब मिल कर इसका विरोध करे................भारतीय सभ्य पुरुष समाज
 
   
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