larger smaller reset
 

इस अंक में

 

ऐसे हुई लादेन से मुलाकात

क्यों असफल हुआ शब्दो

और बड़े हमले कर सकता है लादेन

बांस के बीज यानी वियाग्रा

सहेलियों के ब्याह पर बवाल

बालश्रम को कानूनी मान्यता

प्रदूषण का घर पलक्कड

गरम हुआ गोरखालैंड

पंचायती क़ानून को कुष्ठ

बेरंग हो रहा है काजीरंगा

भगवान नहीं राजा राम

एक स्वयंसेवक की कहानी

किए कराए पर मुहर

अनूठा संपादक

मेरे उस्ताद मेहदी हसन

बड़े भैया

हेनरी मीहोक्स की कविता

एक ही रंग

साफ़ माथे का समाज

 
 
 पहला पन्ना > Politics Print | Send to Friend 

Save and share article:
Delicious
Digg
Reddit
Stumbleupon
Newsvine
वेणुगोपाल बने रहेंगे

वेणुगोपाल बने रहेंगे- सर्वोच्च न्यायालय

नई दिल्ली. 8 मई 2008
उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा कानून बना कर एम्स के निदेशक पी वेणुगोपाल को हटाए जाने के निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि स्वायत्त संस्थानों के काम में सरकार को इस तरह हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.


न्यायाधीश तरूण चटर्जी और एच. एस. बेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए वेणुगोपाल को कार्यकाल पूरा होने तक पद पर कार्य करते रहने का निर्देश भी जारी किया.

 

अदालत के इस फैसले के बाद विपक्षी दल भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों ने स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणी रामदास से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि नैतिकता के आधार पर रामदास को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. जबकि रामदास ने इस तरह की मांग को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता.


पिछले साल 30 नवंबर को सरकार ने क़ानून में संशोधन करके पी वेणुगोपाल को एम्स के निदेशक के पद से हटा दिया था. सरकार ने नए कानून में 65 साल की उम्रसीमा या 5 साल के कार्यकाल को आधार बना कर 66 वर्ष के वेणुगोपाल को उनके पद से हटा दिया था. उनके स्थान पर सरकार ने टीडी डोगरा को एम्स का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया था.


सरकार के इस फैसले के बाद वेणुगोपाल ने अदालत की शरण ली. अदालत के निर्णय के अनुसार वेणुगोपाल इस साल 3 जुलाई तक अपना कार्यकाल खत्म होने तक पद पर बने रहेंगे.


इधर विपक्षी दल भाजपा ने आज अदालत का फैसला आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की. भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने अपने स्वार्थ के लिए नया कानून बनाया था, जिसे उच्चतम न्यायालय ने ठुकरा दिया.

 

भाजपा की ही सुषमा स्वराज ने नैतिक आधार पर रामदास से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अदालत का फैसला आने के बाद उन्हें एक दिन भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है.


भाजपा नेताओं के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रामदास ने कहा कि कानून बनाने का काम संसद ने किया है. ऐसी हालत में उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल (केवल English में लिखें)
  ई-मेल अन्य विजिटर्स को भी दिखाई दे ।
  ई-मेल अन्य विजिटर्स को ना दिखाई दे ।
  नाम (English अथवा हिन्दी)
  प्रतिक्रिया