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दिल्ली में सरकार पर संशय बरकरार

दिल्ली में सरकार पर संशय बरकरार

नई दिल्ली. 9 दिसंबर 2013

केजरीवाल


आम आदमी पार्टी (आप) संयोजक अरविंद केजरीवाल के पार्टी नेता प्रशांत भूषण के भाजपा को सशर्त समर्थन देने की राय को खारिज करने से दिल्ली में सरकार बनने पर अब भी संशय बरकरार है. अरविंद केजरीवाल ने भूषण के वक्तव्य को उनकी निजी राय बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी दिल्ली में सरकार बनाने के लिए न तो समर्थन लेगी और न ही किसी को समर्थन देगी.

इससे पहले प्रशांत भूषण ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी भाजपा को सशर्त समर्थन दे सकती है. भूषण की इस बात से पहले आप संयोजक केजरीवाल ने किनारा कर लिया और भाजपा ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. मामला गड़बड़ता देख भूषण ने भी पलटी मारते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ एक काल्पनिक स्थिति पर बयान दिया था और उनकी पार्टी शुरु से ही भाजपा और कांग्रेस को समर्थन देने के पक्ष में नहीं है.

उधर केजरीवाल ने दिल्ली में अन्य पार्टियों के निर्वाचित विधायकों को सीधे-सीधे आप में जुड़ने का न्यौता न देते हुए यह कहा है कि वे राजनीति के `अच्छे’ लोगों से अपील करते हैं कि आप हमारे साथ आइए, हम अलग तरीके से बढ़ेंगे और आप को प्राथमिकता देंगे.

केजरीवाल ने कहा कि हमारे साथ अहं की कोई समस्या नहीं है, हम सभी को एक साथ आने की जरूरत है. उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों में शामिल अच्छे लोगों से यह अपील की कि अगर वे अपनी संगठन की नीतियों से नाखुश हैं और वहां घुटन महसूस कर रहे हैं, तो अपनी पार्टियों के खिलाफ विद्रोह करें.

वैसे तो दिल्ली के त्रिशंकु जनमत को देखते हुए आप पार्टी विपक्ष में बैठने की बात करती आई है लेकिन अब केजरीवाल द्वारा दिए गये इस बयान को राजनीतिक हलकों में दिल्ली में सरकार बनाने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है.
 


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