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जस्टिस गांगुली पर इस्तीफे का दबाव

जस्टिस गांगुली पर इस्तीफे का दबाव

नई दिल्ली. 16 दिसंबर 2013

जस्टिस गांगुली


लॉ इंटर्न के यौन शोषण के आरोपों का सामना कर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए.के.गांगुली पर पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के उनके मौजूदा पद से इस्तीफा देने का चौतरफा दबाव पड़ रहा है. कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के द्वारा इस्तीफे की मांग के बाद सोमवार को कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने भी कहा कि गांगुली को अब इस्तीफा दे दना चाहिए.

सिब्बल ने सोमवार को संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि "अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह द्वारा किए गए हालिया रहस्योद्घाटन और एक राष्ट्रीय अखबार में प्रकाशित तथ्यों को देखते हुए मेरे विचार से तो न्यायाधीश गांगुली को स्वयं ही इस्तीफा सौंप देना चाहिए".

इससे पहले अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने प्रशिक्षु वकील का हलफनामा रविवार को सार्वजनिक कर दिया था. सोमवार को इस बारे में बोलते हुए जयसिंह ने कहा कि जब उन्हें महसूस हुआ कि एक शक्तिशाली वर्ग पूर्व न्यायाधीश ए.के. गांगुली का समर्थन कर रहा है, तब उन्हें कानून की प्रशिक्षु युवती का हलफनामा सार्वजनिक करने पर मजबूर होना पड़ा.

इस हलफनामा में कहा गया है कि युवती सेवानिवृत्त न्यायाधीश के साथ शोध सहायक के रूप में काम कर रही थी. 24 दिसंबर, 2012 को उन्होंने युवती को अपने होटल के कक्ष में बुलाया और उसे शराब पीने के लिए तथा रात उनके साथ होटल में रहने के लिए कहा.

जयसिंह ने कहा, "रात हो चुकी थी और उन्होंने भोजन मंगवाया और इस दौरान मौखिक और शारीरिक तौर पर अपनी हरकतें शुरू कर दी."

हलफनामा में कहा गया है कि युवती कमरे से बाहर भागी और सीधे घर पहुंची. गांगुली ने इसके बाद उसे संदेश भेजा और फोन कर क्षमा मांगी.

इस मामले पर जयसिंह ने गांगुली के पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने के वास्ते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भी लिखा है. हलफनामा सार्वजनिक करने के अपने फैसले का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि यह मुद्दा मानवाधिकार आयोग की सत्यनिष्ठा और इसके सुचारु संचालन से जुड़ा है.

इससे पहले इस मामले की जाँच के लिए गठन की गई एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने भी गांगुली के प्रशिक्षु के प्रति व्यवहार को गलत ठहराया था. इस मामले में चौतरफा घिरने के बावजूद गांगुली ने अपने पद से इस्तीफा देने से इंकार करते हुए कहा है कि हलफनामा का प्रकाशन उचित नहीं है.


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