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लोकपाल विधेयक संसद में पारित

लोकपाल विधेयक संसद में पारित

नई दिल्ली. 18 दिसंबर 2013

लोकपाल


संसद ने बुधवार को लोकपाल विधेयक अंतत: पारित कर दिया. इस विधेयक में भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल के गठन का प्रावधान है. लोकपाल व लोकायुक्त विधेयक, 2011 बुधवार को भारी हंगामे के बीच लोकसभा में पारित हुआ. राज्यसभा ने संशोधन के साथ इसे मंगलवार को ही पारित कर दिया गया था.

विधेयक का विरोध करते हुए समाजवादी पार्टी(सपा) के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया. ऐसा ही उन्होंने राज्यसभा में भी किया था. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से इस विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा, "यह विधेयक खतरनाक है. इससे देश में संकट उत्पन्न हो जाएगा."

भ्रष्टाचार रोधी इस विधेयक की सबसे मुख्य बात यह है कि इसके लागू होने के एक वर्ष के भीतर राष्ट्रीय स्तर पर लोकपाल और राज्य स्तर पर लोकायुक्तों का गठन किया जाना है. लोकायुक्त के प्रारूप पर फैसला लेने का जिम्मा राज्य विधानसभाओं को सौंपा गया है.

लोकसभा में यह विधेयक सबसे पहले 2011 के शीतकालीन सत्र में पास हुआ था, लेकिन राज्यसभा में मतदान से पहले ही सत्रावसान हो गया था. राज्यसभा की एक प्रवर समिति ने बाद में विधेयक में कई संशोधन के सुझाव दिए थे, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी थी. इस संशोधन के साथ राज्यसभा ने इस विधेयक को मंगलवार को पारित कर दिया.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार को विधेयक पारित कराने का कोई श्रेय नहीं लेना चाहिए.उन्होंने कहा, "यदि किसी को इसका श्रेय जाता है तो वह उस बुजुर्ग आदमी को जाता है जो (अन्ना हजारे) उपवास पर बैठा है."

सुषमा ने कहा कि उनकी पार्टी ने इससे पहले लोकपाल विधेयक का विरोध किया था, क्योंकि वह कमजोर था, लेकिन राज्यसभा में मजबूत विपक्ष ने इसमें पर्याप्त संशोधन कर दिया. इस बिल का जनता दल यूनाइटेड और बहुजन समाज पार्टी ने भी समर्थन किया है.

इधर, सरकार की तरफ से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सभी पार्टियों से विधेयक को पारित करने की अपील की. उन्होंने कहा, "हमारे पास इतिहास बनाने का अवसर है."

इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से गंभीर असहमति जताते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को लोकपाल विधेयक को भ्रष्ट नेताओं के लिए 'सराहनीय विधेयक' करार दिया.

आप के नेता कुमार विश्वास ने कहा, "देश में सामाजिक सक्रियता के लिए यह बुरा दिन है. यह हर भ्रष्ट नेता के लिए सरहानीय विधेयक है." कुमार विश्वास ने कहा, "यह विधेयक रामलीला मैदान में लोगों से किए गए वादे के विपरीत है और धोखा है. यह भाजपा और कांग्रेस की भ्रष्टाचार के मुद्दे से लोगों का ध्यान बंटाने का प्रयास है."


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