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परवाह नहीं, कैसे होगी मौत- विश्वरंजन

परवाह नहीं, कैसे होगी मौत- विश्वरंजन

रायपुर. 13 जनवरी 2010 (छत्तीसगढ़)


प्रशांत भूषण के इस बयान पर कि छत्तीसगढ़ के डीजीपी विश्वरंजन या तो गोली से उड़ा दिए जाएंगे अथवा जेल में होंगे, खुद श्री विश्वरंजन का कहना है कि आदमी की मौत सिर्फ एक बार होती है और वे इस बात की परवाह नहीं करते कि उनका सामना मौत से कैसे होगी. उन्होने पूछा कि आखिर प्रशांत भूषण यह तय करने वाले कौन होते हैं कि उन्हे नक्सली गोली मारेंगे या नहीं?

प्रशांत भूषण के बयान को पूरी तरह एकतरफा बताते हुए विश्वरंजन ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बारे में उनके पास पर्याप्त जानकारी नहीं है. पुराने बस्तर का कुल क्षेत्रफल करीब 40 हजार वर्ग किलोमीटर है जिसमें से बामुश्किल दो सौ वर्ग किलोमीटर पर खनिज पट्टे हैं और यहां निजी औद्योगिक घरानों को खदाने देने के काफी पहले से माओवाद पनप चुका है.

बस्तर में तो 1980 से माओवादी निर्दोषों का खून बहा रहे हैं, विकास रोक रहे हैं तथा स्कूल-सडक़ों को ध्वस्त कर रहे हैं. प्रशांत भूषण को चाहिए कि वे छत्तीसगढ़ खनिज विभाग से जानकारी लेकर अपने बयान को खुद ही सच्चाई की कसौटी पर कसें. निजीकरण और एसईजेड प्रदेश के लिए माओवाद के इतिहास के मुकाबले काफी नए हैं.

विश्वरंजन का कहना है कि ग्रीन हंट ऑपरेशन को रोकने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होने कहा कि ग्रीन हंट के अंतर्गत सिर्फ नक्सली ही निशाने पर हैं और इसके साथ ही आदिवासियों के बीच ग्रीन हंट ऑपरेशन इस बात का जनजागरण कर रहा है कि पुलिस उनकी रक्षा में तत्पर है तथा वे अपनी सुरक्षा संबंधी समस्याएं लेकर पुलिस के पास आएं. पुलिस उनकी पूरी हिफाजत करेगी. उन्हे हमसे डरने की जरूरत नहीं है.

डीजीपी ने दावा किया कि इसका व्यापक असर हुआ है और आदिवासी खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं तथा पुलिस को स्वस्फूर्त सहयोग दे रहे हैं. उन्होने प्रशांत भूषण के इस बयान को भी गलत बताया कि पुलिस के हाथों सौ निर्दोषों की हत्या के मुकाबले नक्सली एक बेगुनाह आदिवासी को मार रहे हैं. उन्होने कहा कि पिछले कई वर्षों से नक्सली निर्दोष आदिवासियों के खून-खराबे का घिनौना खेल खेलते आ रहे हैं. हाल ही में एक प्रदर्शनी लगाई गई थी जिसमें प्रदर्शित चित्रों में स्पष्ट दिखाई देता है कि नक्सली किस हद तक हिंसा का इस्तेमाल कर रहे हैं और निर्दोष आदिवासियों और नागरिकों के प्राण ले रहे हैं.

प्रशांत भूषण द्वारा एमनेस्टी इंटरनेशनल की ओर से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किए जाने के प्रस्ताव पर श्री विश्वरंजन ने कहा कि कोई भी व्यक्ति या एजेंसी आकर देख सकती है कि इन क्षेत्रों में क्या हो रहा है. ऐसे किसी भी व्यक्ति या एजेंसी का स्वागत है.

पुलिस महानिदेशक का कहना है कि अगर बातचीत के लिए नक्सलियों के पास कोई मुद्दा ही नहीं है तो इतनी लंबी लड़ाई आखिर वे किस आधार पर लड़ रहे हैं यह उनके बीच जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार संगठनों और उनके प्रतिनिधियों के सोचने की बात है. इसी से साबित होता है कि वे हिंसा में विश्वास रखते हैं और शांति प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे.

प्रशांत भूषण के इस बयान पर कि 'विश्वरंजन छद्म साहित्यकार हैं, उन्होने कहा कि यह तय करना साहित्यिक बिरादरी और पाठकों का काम है न कि प्रशांत भूषण का. इसके बारे में उन्हे बहुत ज्यादा कुछ नहीं कहना है.

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