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प्रशांत भूषण चाहते हैं नक्सल इलाके में जनमत संग्रह

प्रशांत भूषण चाहते हैं नक्सल इलाके में जनमत संग्रह

नई दिल्ली. 13 जनवरी 2014

प्रशांत भूषण


नक्सल मुद्दे पर जनमत संग्रह की प्रशांत भूषण की मांग को लेकर आप पार्टी ने पल्ला झाड़ लिया है. प्रशांत भूषण का कहना था कि नक्सल इलाके में सुरक्षाबल की तैनाती को लेकर जनमत संग्रह कराया जाना चाहिये. उनका कहना था कि नक्सल प्रभावित इलाकों में आम आदिवासी परेशान है और उसके लिये सुरक्षा बल एक बड़ी परेशानी का सबब है.

इधर प्रशांत भूषण के बयान को लेकर भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा है कि इस तरह के बयानों से मसले से निपटने के लिए राज्य सरकार की मदद से केंद्र सरकार के उठाए जा रहे कदम बेकार हो जाएंगे और सुरक्षाबलों का मनोबल भी टूटेगा. उनका कहना है कि प्रशांत भूषण की इस मांग को लेकर केजरीवाल और उनकी पार्टी को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिये.

इससे पहले 2010 में प्रशांत भूषण ने अपने छत्तीसगढ़ दौरे में कहा था कि राज्य की ओर से नक्सलियों के खिलाफ चलाये जाने वाले हमलों को रोकने की जरुरत है और इसके साथ ही तीन काम किए जाने अत्यंत आवश्यक हैं, वे हैं-भूमि सुधार लागू करना, खदान माफिया खत्म करना और एसईजेड के नाम पर होने वाले गैर कानूनी भूमि अधिग्रहण व निजीकरण को रोकना.

उन्होंने कहा था कि किसी भी रूप में जमीनों का हो रहा अधिग्रहण रोका जाना चाहिए क्योकि इससे आदिवासियों में व्यापक असंतोष फैल रहा है और उनके जीवन-यापन के साधन छिन रहे हैं. उन्होंने पूरे लाल गलियारे में एसईजेड के कारण नक्सली गतिविधियों के बढऩे की बात कही. उन्होने कहा कि एसईजेड दरअसल पैसे वालों के लिए अनैतिक और गैर सांवैधानिक तरीके से जमीन हथियाने की सरकारी चाल है जिसमें जनता का कोई फायदा नहीं है. यहां बड़े-बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान आएंगे और उसके बाद आदिवासियों और ग्रामीणो के लिए कोई भी विकल्प नहीं बचेगा. वे या तो अपनी जमीनें छोडक़र भाग जाएंगे अथवा नक्सली बनकर लड़ते रहेंगे.

माओवादियों के इलाकों में खदानों के निजीकरण पर तत्काल रोक की मांग करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा था कि इससे सरकार को कोई विशेष फायदा नहीं हो रहा है.

अब प्रशांत भूषण की ताज़ा मांग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. देखने वाली बात ये है कि कभी छत्तीसगढ़ आ कर विनायक सेन के पक्ष में अभियान चलाने वाले अरविंद केजरीवाल अब प्रशांत भूषण की इस बयानबाजी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कितना इस बयान के पक्ष में खड़े होते हैं.


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